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सत्यानाशी का पौधा औषधीय गुणों वाला होता है। इसका प्रयोग कई बीमारियों में किया जाता है। आज हम आपको सत्यानाशी के बीजों के बारे में बताने जा रहे हैं। सत्यानाशी का फल चौकोर, कंटकित, प्यालानुमा होता है, जिनमें राई की तरह छोटे-छोटे काले रंग के बीज भरे रहते हैं। आपको बता दें कि ये बीज जलते कोयलों पर डालने से भड़भड़ बोलते हैं। शायद इसीलिए उत्तर प्रदेश में इसको भड़भांड़ या भड़भड़वा भी कहते है।
आपको बता दें कि सत्यानाशी के बीज बहुत ज़हरीले होते हैं। इनका सेवन करने भर से मौत हो जाती है। आईसीएआर दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एक शोध में बताया कि इसके बीजों का सेवन करने से अचानक शरीर में सूजन आ जाती है और किडनी फेल हो जाती है, जिससे व्यक्ति की 48-72 घंटे में ही मौत हो जाती है। सत्यानाशी के बीजों की बहुत भारी मात्रा में उपज होती है। यह बिना बोये ही भारी संख्या में उग जाता है।
ग़ौरतलब है कि सत्यानाशी के बोजों का सेवन वैसे तो कोई नहीं करता है, किन्तु कुछ व्यापारी कभी-कभी इसके बीजों को सरसों में मिला देते हैं। इससे व्यक्ति इसके तेल का सेवन कर लेता है। अगर सरसों के बीजों में सत्यानाशी के बीजों की संख्या ज्यादा होती है, तो उससे तेल का सेवन करने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है।
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