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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अदाकार दिलीप कुमार के पिछले कुछ दिनों से काफी बीमार चल रहे हैं, बीती रात ही उनके एक बार फिर से अस्पताल में भर्ती होने की खबर आई है। इसके पहले भी उन्हें 5 सितम्बर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जाहिर है अब बढ़ती उम्र के साथ ही दिलीप साहेब की स्थिति नाजुक हो चली हैं, परिवार के करीबियों की माने तो वे चलने फिरने के साथ ही लोगों को पहचानने में भी असमर्थ हो चुके हैं, खबरें तो यहां तक भी आई हैं कि वे अपनी पत्नी सायरा बानो को भी पहचान नहीं पा रहे हैं। वहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार को लेकर आ रही, ऐसी खबरों को खंडन किया है।
दरअसल, मीडिया में ऐसी खबरें आ रही थीं कि दिलीप साहेब भले ही शारीरिक रूप से जिंदा हैं, पर वे मानसिक रूप से हमसे काफी दूर जा चुके हैं। परिवार के बेहद करीबी व्यक्ति ने मीडिया को ये बताया था कि दिलीप साहेब इस वक्त किसी को पहचान तक नहीं पा रहे हैं, यहां तक कि वे अपनी पत्नी सायरा बानो को भी भूल चुके हैं... साथ ही वे बात करने और चलने-फिरने में भी बिल्कुल असमर्थ हो चले हैं.. उन्हें बाथरूम भी सहारे से ले जाना पड़ रहा है... इस हालत में वे अब इस दुनिया किसी तरह से जुड़ाव महसूस नहीं कर रहे रहे हैं।'
वहीं सायरा बानो ने ऐसी खबरों को गलत करार दिया है। सायरा बानो से जब मीडिया ने इस बारे में सवाल किया कि क्या वाकई दिलीप साहेब लोगों को पहचान नहीं पा रहे हैं, तो सायरा ने कहा कि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है। जाहिर है सायरा के इस बयान से दिलीप साहेब के फैंस को बड़ी राहत मिली होगी, क्योंकि दिलीप साहेब जैसी महान शख्सियत को कोई भी खोना नहीं चाहता ।
दिलीप कुमार के फिल्मी करियर की बात करें तो उन्होने फिल्म 'ज्वार भाटा' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, जिसके बाद 'मुगल-ए-आजम', 'देवदास', 'नया दौर','गंगा जमुना' और 'क्रांति, जैसी हिट फिल्मों के जरिए उन्होने हिंदी सिनेमा में बेहद ऊंचा मुकाम बनाया है। वहीं साल दिलीप कुमार आखिरी बार 1998 में आई फिल्म 'किला' में दिखाई दिए थे... इस तरह वे पांच दशकों से भी अधिक समय तक दर्शको के दिलो पर राज किया है। दिलीप कुमार के सिनेमा के प्रति इसी योगदाने को देखते हुए उन्हें साल 1994 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
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Author: Yashodhara Virodai
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