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नवरात्रि की पूजा को हिन्दू धर्म में बहुत ही विशेष पूजा के तौर पर जाना जाता है। इसमें नौ दिनों पर देवी के नौ रूपो की प्रतिस्थापना करके उनकी विधिवत पूजा, आराधना, प्रार्थना और योग किया जाता है। इससे बहुत ही कम समय में देवी यज्ञवान से प्रसन्न होकर फल दे देती हैं। लेकिन आपको बताना है कि हममे से कई लोग ऐसे हैं जो देवी दुर्गा की पूजा करते वक़्त कई तरह की छोटी-छोटी ग़लतियाँ कर देते हैं, जिससे उनकी पूजा खण्डित हो जाती है और नको उनकी पूजा को फल तो दूर कभी-कभी इसका उल्टा प्रभाव पड़कर उनको इसका नुकसान भी उठाना पड़ जाता है। जी हाँ, पूजा-पाठ जितना फायदेमंद है, उसे ग़लत ढंग से करने पर इसके नुकसान भी हो जाते हैं। इसलिए पूजा के वक़्त हमें कम से कम ग़लतियाँ करनी चाहिए। आइए जानते हैं कि आज रात जब हमें माता दुर्गा की पूजा करने बैठें तो हमसे कौन-कौन सी ग़तलियाँ नहीं होनी चाहिए।
दीपक को ज़मीन में न रखेः
शास्त्रों में पूजा की कुछ चीज़ो को जमीन में रखने से मना किया गया है। यदि आप दीपक से पूजा करते है तो आरती करने के बाद उसे सीधे जमीन में ना रखे। उसे किसी लकड़ी में आप रख सकते है। ऐसा करने से दीपक की दिव्य ऊर्जा सीधे जमीन में नहीं जायेगी और वह आपको प्राप्त हो जाएगी।
देवी के वस्त्रादि का रख-रखावः
कई बार जब हम देवी माँ के वस्त्र इत्यादि को साफ़ करने या बदलने के लिए रखते हैं, तो उसे ऐसे ही जमीन पर रख देते है। परन्तु ऐसा करने से हम उन्हें अशुद्ध कर देते है, जिससे देवी माँ नाराज़ होती हैं। पूजा के वस्त्र या बर्तन धोते समय भी उन्हें किसी लकड़ी या पात्र इत्यादि में रखे, जिससे की वह सीधे ज़मीन के सम्पर्क में ना आये।
बिना नहाये पूजा न करेः
देवी माँ की पूजा कभी भी बगैर नहाये नहीं करनी चाहिए। नहाने से पहले हम अशुद्ध होते है और इस तरह से की गई पूजा का विपरीत फल हमे प्राप्त होता है। इसलिए सदैव नहाने के बाद ही पूजा करनी चाहिए।
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