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भगवान भोलेनाथ के त्रिशूल के बीचो बीच बसे इस शहर में आप रम जाएंगे। बिलकुल देसी भाषा और गुस्से में भी टपकता प्यार यहां की खासियत है। वैसे तो वाराणसी कई चीजों के लि फेमस है और ऐसे में अगर आप घूमने के लिए बनारस आने का मन बना रहे हैं तो यहां वीजा से भी ज्यादा जरूरी है शिव जी की मर्जी।
शिव नगरी वाराणसी में घूमने के लिए आपके पास जगहों की कमी नहीं पड़ेगी हां वक्त की कमी जरूर हो सकती है। यहां मंदिर इतने हैं कि आपक गिनते गिनते थक जाएंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, संकट मोचन, काल भैरव यहां के मुख्य मंदिर है इसके अलावा यहां छोटे छोटे कई और मंदिर हैं जहां की मान्यता भी काफी।
काशी विश्वनाथ मंदिर
बनारत में दो काशी विश्वनाथ मंदिर है। एक तो वाराणसी के गदौलिया इलाके में बसा है जहां कि मान्यता है कि शिव से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। गंगा घाट से कुछ दूरी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको गलियों के रास्ते पैदल ही जाना होगा। इसके अलावा बनारस हिंदु विश्वविद्यालय यानी की बीएचयू में एक नए काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया गया है जो काफी भव्य है।
दुर्गा कुंड
वाराणसी का दुर्गा कुंड मंदिर भी काफी प्राचीन मंदिर है। मां देवी की पूजा के लिए यहां भक्त दूर- दूर से आते हैं। मंदिर के प्रांगण में ही एक कुंड हैं जहां पर स्नान करके पूजा करने का एक अलग ही महत्व है। गर्मी कितनी भी भीषण क्यों ना हो ये कुंड कभी सूखता नहीं है।
भैरव मंदिर
काशी के कोतवाल यानी की काल भैरव मंदिर की भी अहमियत काफी ज्यादा है। कहते हैं कि अगर बनारस आए हैं और काल भैरव के दर्शन नहीं किए तो आपकी ये यात्रा अधूरी है।
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