Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
रामायण की कहानी यूं तो हमेशा जीवंत और प्रभु श्रीराम का मर्यादा पुरुषोत्तम वाला चरित्र सदियों तक बना रहेगा। राम और रावण का युद्ध उनकी सेना और उसमें शामिल सभी पात्रों की भूमिका को भी भविष्य में हमेशा वर्णन होगा। पर कुछ ही लोग जानते हैं कि रावण के अंदर कुछ ऐसी खूबियां भी थी। जिनसे राम खुद प्रभावित थे, साथ ही रावण को महान पंडित और योद्धा की उपाधि अपने शब्दों में दी थी। आज हम रावण की कुछ ऐसी ही खूबियों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।
महाज्ञानी रावण
रावण को महाज्ञानी के रूप में भी जाना जाता है। रावण को संपूर्ण ब्रम्हांण की जानकारी थी। साथ ही सभी विद्याओं में निपुण था। कहा जाता है, कि वो ब्रम्हा और सरस्वती द्वारा रचित सभी विद्याओं को कंठस्त कर चुका था। इसीलिए मृत्यु के ठीक पहले राम ने कहा था महा पंडित संसार से जा रहा है, लक्ष्मण कुछ ज्ञान ले लो।
सबसे बड़ा शिव भक्त
रावण को सबसे बड़ा शिव भक्त भी कहा जाता है। रावण ने तपस्या के दौरान शिव जी को दस बार अपना सिर काटकर चढ़ाया था। जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे वरदान दिया था।
रचयिता
रावण बहुत बड़ा शिवभक्त था। उसने ही शिव की स्तुति में तांडव स्तोत्र लिखा था। रावण ने ही अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी।
परिवार के लिए समर्पित
रावण ने कभी सीता के लिए युद्ध नहीं लड़ा। बल्कि अपनी बहन सूपण्खा के लिए राम से युद्ध किया, जिसमें पूरे परिवार समेत प्राणों की आहुति दे दी। रावण के इस चरित्र से बहन के लिए असीम प्रेम भाव और अपमानित करने वाले के विरुद्ध खड़ा होने वाला साबित करता है।वहीं दूसरी तरफ खुद भी पत्नी मंदोदरी के अलावा किसी से व्याह नहीं किया। दो साल तक सीता घर में न रखकर वाटिका में रख कर पुरुषार्थ का उच्च उदाहरण दिया।
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 1
  • 1
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.