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शंखपुष्पी के पौधा का उपयोग हज़ारों सालों से आयुर्वेद में हो रहा है। इसे लैटिन में प्लेडेरा डेकूसेटा के नाम से जाना जाता है। आपको बता दें कि इसके शंख के समान आकृति वाले श्र्वेत पुष्प होने से इसे शंखपुष्पी कहते है। शंखपुष्पी दूध के समान एक बेहतरीन सफेद फूल है। आयुर्वेद शास्त्र में श्र्वेत पुष्पों वाली शंखपुष्पी को औषधि माना गया है। दिलचस्प है कि अब तक शंखपुष्पी को लोग केवल स्मरण शक्ति बढ़ाने वाली बूटी के तौर पर ही जानते आये हैं, जबकि उसके कई और भी अलग-अलग तरह के भी फ़ायदे हैं। आईए आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार आज हम आपको शंखपुष्पी के कुछ और रामबाण फायदों के बारे में बताते है, जिसे पूरी दुनिया सहित ऐलोपैथिक डॉक्टरों ने भी माना है।
ग़ौरतलब है कि अगर आपको अनिद्रा, अपस्मार रोग, सुजाक, मानिकस रोग, भ्रम जैसी शिकायतें हैं तो इसका महीन पिसा हुआ चूर्ण 1-1 चम्मच सुबह-शाम मीठे दूध के साथ या मिश्री की चाशनी के साथ सेवन करने से इन सब रोगों से छुटकारा मिलता है।
इसके अलावा बुखार में शंखपुष्पी के पंचांग जड, तना, फल, पत्ते फूल का चूर्ण और मिश्री को मिलाकर पीस लें। इसे 1-1 चम्मच की मात्रा में पानी से रोजाना 2-3 बार सेवन करने से तेज बुखार व बिगडा मानसिक संतुलन ठीक हो जाता है।
ताजा शंखपुष्पी के जड, फल, फूल, तना, पत्ते का रस 4 चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से कुछ महीनों में मिर्गी का रोग दूर हो जाता है। शंखपुष्पी का उत्तेजना शामक प्रभाव उच्च रक्तचाप को घटकर उसको सामान्य स्तर पर लाता है।
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