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आज है नवरात्र का आखरी यानी 9वां दिन। इस दिन दुर्गा मां की पूजा की जाती है। कुछ लोग आज के दिन कन्या पूजा भी करते हैं। इसी दिन मां दुर्गा महिषासुर का वध करके लोटी थी। साथ ही मां दुर्गा अपने प्रचंड रूप में नज़र आती हैं। बता दें कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अपनी तरह से मनाया जाता है। मां दुर्गा की पूजा करने के लिए पंडाल लगते हैं। साथ ही दूसरी चीज़ों का भी इंतज़ाम होता है।
तो जानिये कि किस तरह करते हैं मां दुर्गा के प्रचंड रूप की अराधना...
देवी वन्दना
आरती पूजा का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम भाग होता है। शास्त्रों के अनुसार, आरती को आरक्तिका, आर्रतिका या नीराजन भी कहा जाता है। कोई भी पूजा, कोई भी हवन या षोडशोपचार पूजा हो सभी में आरती अंत में की जाती है। सामान्यतौर पर दुर्गा आरती कपूर और दीये से की जाती है। ऐसा जरुरी नहीं की हर बार यह ऐसे ही की जाए कुछ लोग इसे बत्तियों से भी करते है।
दुर्गा आरती सप्तशती दुर्गा पाठ करने के बाद की जाती है। यह पाठ हर कोई अपनी अपनी परम्परा के अनुसार पढता है। कोई सभी को एक ही दिन में पढता है तो कोई सभी दिनों में इन अध्यायों को सम्पन्न करता है।
आरती के लिए आवश्यक सामग्री
आरती करने के लिए चांदी, पीतल या तांबे की थाली का इस्तेमाल किया जाता है। इस थाली में लौंग, पान का पत्ता और कपूर रखा जाता है। साथ ही एक घंटी भी ली जाती है जिसे आरती के दौरान बजाया जाता है। साथ ही घी का दीपक भी बनाया जाता है जिसमे रुई की बत्ती होती है। और इस दिप और कपूर से माँ दुर्गा की आरती की जाती है। इसे प्रातःकाल और सांयकाल दोनों समय करना चाहिए।
दुर्गा माँ की आरती
आरती करने के लिए सभी सामानो को एकत्रित करने के बाद पूजा शुरू करें। सर्वप्रथम देवी की जोत जलाकर उनकी पूजा अर्चना करें और उसके बाद पाठ सम्पन्न करने। पाठ सम्पन्न करने के बाद बारी आती है आरती की। आरती पूजा का सबसे अंतिम चरण होता है। इसके लिए एक प्लेट में कपूर, लौंग, पान का पत्ता आदि रखें। साथ में घी का दीपक भी बनायें। अब घी के दीपक और कपूर को जलाकर दुर्गा माँ की आरती गायें।
आरती समाप्त होने के पश्चात् शंख नाद करें। बता दें, शंखनाद करना घर के वातावरण के लिए बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से घर में भक्ति रस का विस्तार होता है। शंख नाद के बाद एक बार पुरे घर में आरती घुमाएं।
कहा जाता है कि लौंग और कपूर को साथ में जलाने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती है और उसकी गंध से घर में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है। साथ ही घर का वातावरण भी अच्छा होता है। उसके बाद पुरे घर में पूजा में रखा जल छिड़क दें। अंत में देवी माँ, को दंडवत प्रणाम करके अपनी भूल की क्षमा मांगे और हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
माँ दुर्गा की आरती इस प्रकार गाएं...
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी |
तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ||
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को |
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ||
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै |
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पार साजै ||
केहरि वाहन राजत, खडूग खप्पर धारी |
सुर – नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ||
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती |
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ||
शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती |
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मतमाती ||
चण्ड – मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे |
मधु – कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ||
ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी |
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ||
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु |
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ||
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता |
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ||
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी |
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ||
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती |
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ||
अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख – सम्पत्ति पावे ||
Author- Anida Saifi
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