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करवाचौथ हिंदू पंचाग के अनुसार कार्तिक माह की चौथी तिथि को मनाया जाता है। परंपराओं के अनुसार इस दिन शादीशुदा महिलाएं या जिनकी शादी होने वाली है वो लड़कियां अपने पति या होने वाले पति की लंबी आयु के लिए व्रत करती हैं। ये व्रत सुबह सूरज उगने से पहले से शुरू होकर रात्रि में चंद्रमा निकलने तक रहता है। ये एकदिवसीय त्योहार अधिकतर उत्तरी भारत के राज्यों में मनाया जाता है। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, राज्यस्थान और उत्तर प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस व्रत को शुरू करन पहले महिलाएं भोर में उठकर सरगी खाती हैं, इसके बाद से इनका उपवास दिनभर निर्जला ही रहता है जो रात में चंद्रमा निकलने के साथ पति को निहार कर खोला जाता है।
ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को रखने से पहले सरगी का सेवन बेहद ज़रूरी है, जिससे हमें दिनभर के लिए ज़रूरी कैलॉरी मिलती रहती है। लेकिन लोगों को अक्सर इस बात का कंफ्यूजन रहता है कि सरगी की थाल में क्या रखें और क्या नहीं। इसी दुविधा को दूर करने के लिए बता रहे है आपको सरगी की थाल के बारे में।
क्या होती है सरगी-
सरगी करवा चौथ के दिन दिया जाने वाला मुख्य भोजन होता है। सूर्योदय से पहले यानी लगभग 4-5 बजे सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। सरगी के साथ ही सास अपनी बहू भरपूर आशीर्वाद भी देती है जिससे बहू अपना ये व्रत अच्छे से पूरा कर सके।
क्या होता है सरगी में शामिल-
सरगी की थाली में मिठाई, मठरी, फल, ड्राई फ्रूट्स, पूरी, कपड़े, गहने, सेवईं रखे जाते हैं. इन सभी चीजो को थाली में रखने का अपना-अपना महत्व होता है।
Author- Anida Saifi
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