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धनतेरस पर कई तरह की कथाएं सुनाई जाती हैं। इसी के साथ एक और कथा है ये भी जिसमें शास्त्रों के अनुसार एक अलग कहानी सुनाई जाती है। आपको बता दें कि ये एक तरह त्याग की कथा है जिससे प्रेरित होकर धनतेरस मनाया जाता है।
इस कथा के अनुसार देवताओं को राजा बलि के प्रकोप से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंच गए। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भी भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे उन्हें इंकार कर देना।
बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। उन्होनें वामन भगवान से दान मांगने को कहा तब भगवान ने राजावलि से 3 पग जमीन मांगी। इसके बाद बलि ने तीन पग भूमि दान करने का संकल्प ले लिया। तब भगवान वामन ने अपने एक पैर से संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया और दूसरे पग से अंतरिक्ष को।
तीसरा पग रखने के लिए कोई स्थान नहीं होने पर बलि ने अपना सिर वामन भगवान के चरणों में रख दिया। बलि दान में अपना सब कुछ गंवा बैठा। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिली और बलि ने जो धन-संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे 13 कई गुना अधिक धन-संपत्ति देवताओं को मिल गई। अभी से इस दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
Author- Anida Saifi
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