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गोवर्धन पूजा को आज देशभर में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गाय के गोबर से बने किसी मूर्त रूप (आप अपने आराध्य को भी मूर्त रूप दे सकते हैं) पर सिर नवाने और उसकी पूजा करने से आपके जीवन में काफी अच्छे-अच्छे बदलाव आने लग जाते हैं। वैसे हमें इस बात का तो पता नहीं कि आगे क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं। लेकिन, हमें ये ज़रूर मालूम है कि इस दिन स्वयं भगवान कृष्ण के जीवन में कैसा बड़ा और महान परिवर्तन आया था। वास्तव में आज हम आपको उसी परिवर्तन के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं...
दिलचस्प है कि दिवाली के बाद प्रतिपदा वाले यानी आज के ही दिन भगवान कृष्ण को एक नयी पहचान मिली ही थी। जी हाँ, आपको पता ही होगा कि अक्सर लोगों के नाम इनके कर्मों की वजह से या नेचर की वजह से लोग रख देते हैं, फिर चाहे किसी का वास्तविक नाम कुछ भी हो। रोचक बात यह है कि ये नाम उस व्यक्ति को पहली दफ़ा पुकारने वाला बहुसंख्यक जनता से ही कोई होता है, जिसे जनमानस ही आगे लेकर जाता है। ठीक ऐसा ही कारनाम भगवान कृष्ण के साथ हुआ था।
आपको बता दें कि पुराणों के अनुसार गोवर्धन पूजा वाले दिन ही भगवान श्री कृष्ण को वृंदावन की जनता और अनेक गायों की इंद्र के प्रकोप से उपजी जानलेवा मूसलाधान बारिश से जीवन रक्षा के एलज में एक नया नाम ‘गोविन्द’ मिला था। उनको ये नाम स्वयं कामधेनु सुरभि गौ माता ने दिया था। मालूम हो कि गौमाता कामधेनु सुरभि को संसार की समस्त गौ माताओं की माता के रूप में स्वीकार्य किया गया है, जिनका निवास स्वर्ग में बताया जाता है।
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