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Inspiration के लिए एक सागर की तरह हमारे देश के महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवन भरा पड़ा है। इसमें से आप अपने जीवन में उपयोग आने वाली बातों को जमाकर उनको अमल में ला सकते हैं। इससे आपका जीवन शाक्तिशाली बनता है और आगे के जीवन में अनेक निर्णय करने के लिए आप अपने विवेक से इनका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कड़ी में आज हम बात करने जा रहे हैं उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में पैदा हुये महान क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल के बारे में। आपको बता दें कि बिस्मिल न सिर्फ़ एक क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, बल्कि ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। दिलचस्प है कि राम प्रसाद बिस्मिल एक कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाभाषी, इतिहासकार एवं साहित्यकार भी थे। आइए जानते हैं Inspiration से भर देने वाली बिस्मिल की 5 रोचक बातें।
मैनपुरी षड्यंत्रः
बिस्मिल मातृवेदी संस्था से जुड़े थे। इस संस्था में रहते हुए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए काफी हथियार एकत्रित किया, लेकिन अंग्रेजी सेना को इसकी जानकारी मिल गई। अंग्रेजों ने हमला बोलकर काफी हथियार बरामद कर लिए। इस घटना को ही मैनपुरी षड्यंत्र के नाम से भी जाना जाता है।
प्रसिद्द वक्तव्यः
बिस्मिल ने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर काफी काम किए हैं और काफी लिखा भी है। उनकी ये पंक्तियां... 'सरकार ने अशफाकउल्ला खां को रामप्रसाद का दाहिना हाथ करार दिया। अशफाकउल्ला कट्टर मुसलमान होकर पक्के आर्यसमाजी और रामप्रसाद का क्रान्तिकारी दल का हाथ बन सकते हैं, तब क्या नये भारतवर्ष की स्वतन्त्रता के नाम पर हिन्दू मुसलमान अपने निजी छोटे-छोटे फायदों का ख्याल न करके आपस में एक नहीं हो सकते?' काफी प्रसिद्ध है।
बिस्मिल का विनयः
राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने आत्मकथा के अंत में देशवासियों से एक अंतिम विनय किया था। 'जो कुछ करें, सब मिलकर करें और सब देश की भलाई के लिए करें। इसी से सबका भला होगा।
बिस्मिल को फाँसीः
काकोरी कांड को अंजाम देने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और मुकदमा चलाया गया। 18 महीने तक मुकदमा चलाने के बाद 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में फांसी दे दी गई।
काकोरी के शहीदः
राम प्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा गणेश शंकर विद्यार्थी ने 'काकोरी के शहीद' के नाम से उनके शहीद होने के बाद 1928 में छापी।
Author: Amit Rajpoot
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