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छठ महोत्सव का आज दूसरा दिन है। इससे पहले रविवार को नहाय-खाय मनाया जा चुका है। आपको बता दें कि आने वाले कल यानी कि मंगलवार की संध्या को सूर्य देव को सांध्य अर्घ्य दिया जायेगा और इसके बाद बुधवार को उषा-अर्घ्य देकर सूर्य प्रणाम किया जायेगा। इस प्रकार से छठ महोत्सव के चारो दिन पूरे हो जायेंगे। इसके लिए लोगों में काफ़ी उत्साह देखा जा रहा है। इस पर्व को प्रकृति की प्रत्यक्ष पूजा के तौर पर देखा जाता है और लोगों का यह मानना है कि इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही प्रकृति में नई चेतना का संचार होता है और लोग आने वाले समय को नये वर्ष के रूप में देखते हैं।
ग़ौरतलब है कि नवरात्रि और दूर्गा पूजा की तरह छठ भी हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। मुख्यत: यह पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर-प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला पर्व है। यहां इस पर्व को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है, लेकिन चूंकि इस हिस्से के लोग अब देश-विदेश में फैले हुए हैं, इसलिए अब यह पर्व कई जगह उसी आस्था और उत्साह से मनाया जाता है। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ सूर्य देव की बहन हैं और सूर्योपासना करने से छठ माता प्रसन्ना होकर घर परिवार में सुख-शांति व धन-धान्य प्रदान करती हैं। वैसे तो सूर्य की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, चैत्र शुक्ल की षष्ठी व कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को। चैत्र शुक्ल की षष्ठी को काफी कम लोग यह पर्व मनाते हैं, लेकिन कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है।
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