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भारत में महिलाओं ने हमेशा से संघर्ष किया है। उत्तर वैदिक काल से लेकर आज तक हर समय में उन्होंने अपने ही समाज से ख़ुद की बेहतरी के लिए लड़ाई लड़ी है। कभी बाल विवाह, तो कभी सती प्रथा, तो कभी मंदिरों में दासी बनाकर रखा जाना और इन सबके अलावा भी उन्हें वेश्यालयों में धकेल देना भारत में महिलाओं की बेहद ख़राब स्थिति के स्याह उदाहरण हैं। हालाँकि हैरानी है कि ज़्यादातर लोगों का मानना है कि भारत में महिलाओं के साथ वो सब बंद हो चुका है, लेकिन आपको बता दें कि यदि आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो आप हवा में हैं। जी हाँ, हवा में...।
सबसे पहले तो आप ये बताइए कि यदि आपसे ये सवाल किया जाये कि क्या आप जानते हैं कि भारत में आज भी महिलाओं के साथ वही सब होता है, जो उनके साथ पहले होता आया है, तो शायद आप इसका जवाब न में ही देंगे। लेकिन हम आपको बता दें कि आज भी हमारे देश में अंधविश्वास ने लोगों को अपनी कैद में कर रखा है। इसके आगे वो कुछ भी समझना ही नहीं चाहते हैं, क्योंकि कभी-कभी ऐसे कई मामले सामने आते हैं जो हैरान कर देने वाले होते हैं।
सबसे बड़ी बात तो ये है कि हमारे यहाँ आज भी देवदासी जैसी प्रथा ज़िन्दा है। जी हाँ, वही देवदासी प्रथा जिसमें बच्चियों को मंदिर को समर्पित कर दिया जाता है। बताया जाता है देवदासी बनकर जब बच्ची मंदिरों में पहुँची है तो वह अपनी बाकी की जिंदगी मंदिरों में रहकर ही गुजारती है। वहीं इस तरह की लड़की को सार्वजनिक संपत्ति माना जाता है, जिसके साथ कुछ भी किया जा सकता है। इस बात को कई मानवाधिकार कर्यकर्ताओं ने उजागर किया है कि भारत में अभी तक देवदासी प्रथा कई राज्यों में प्रचलित है।
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