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हिन्दू कैलेण्डर का प्रयोग भारत में प्राचीन काल से लेकर आज तक होता आया है। इसमें भी 12 महीने ही होते हैं। आपको बता दें कि हिन्दू कैलेण्डर खलोल विज्ञान और धर्म पर केन्द्रित है, जिसमें ऋतुओं का मौसम का भई ख़्याल रखा गया है। इसे हम पंचांग भी कहते हैं। पंचांग का अर्थ है पाँच और अंग को मिलाकर समझा जा सकता है, जिसका अर्थ है पाँच भाग। इसीलिए वैदिक ज्योतिष में पाँच मौलिक समय के हिस्सों को एक साथ पंचांग कहते हैं। दिलचस्प है कि पंचांग का उपयोग वैदिक ज्योतिषियों द्वारा समय का शुभ महूर्त तय करने के लिए किया जाता है।
आपको बता दें कि हिन्दू कैलेण्डर में समय और काल निर्धारण के सभी पाँच तत्वों यथा- तिथि, वार, पक्ष, कारण योग और नक्षत्रों का समावेश होता है। इन्ही सभी तत्वों का मिला जुला योग ही पंचांग कहलाता है, जिसे हम कैलेंडर कहते हैं। हिन्दू कैलेण्डर का उपयोग आज भी भारत में प्रमुखता के साथ उपयोग में लिया जाता है। इसी से लोग अपने सभी शुभ कामों का समय चुनते हैं। इसी से वर-विवाह की परंपरा आज भी हमारे देश में हैं और यहाँ तक सभी हिन्दू त्यौहार इसी कैलेंडर के हिसाब से ही आते हैं।
हिन्दू पंचांग के अनुसार महीनों के नामः
1- चैत्रया चैत
2- वैशाख या बैसाख
3- ज्येष्ठ या जेठ
4-आषाढ़ या आसाढ़
5- श्रावण या सावन
6-भाद्रपद या भादों
7- आश्विन या क्वार
8- कार्तिक या कातिक
9- अग्रहायण या अगहन या मार्गशीर्ष
10- पौष या पूस
11- माघ
12- फाल्गुन या फागुन
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Author: Amit Rajpoot
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