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पिछले दो सालों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज ने मनोरंजन की दुनिया पर अपना कब्जा सा कर लिया है। इसका एक उद्देश्य ये है कि कहानियों के साथ इस्तेमाल हो रहा है और नए कंटेट ने दर्शकों के बीच विकल्प दिया है। टीवी से अलग यहां सास-बहू का घिसा-पिटा ड्रामा नहीं है और ना ही लंबे-लंबे ब्रेक। हालांकि अभी भी दर्शकों का एक बड़ा वर्ग है जो वेब सीरीज से अछूता है। ऐसे में चलिए हम आपको बताते हैं कि क्या होती है वेब सीरीज और क्यों बढ़ रही है निरंतर इसकी मांग।
क्या है वेब सीरीज ?
फिल्मों और टीवी सीरियल से अलग वेब सीरीज में 8 से 10 एपिसोड होते हैं। ये सीरीज अलग-अलग कहानी पर निर्भर होती हैं। एक एपिसोड 25 से 45 मिनट तक के होते हैं। ये वेब सीरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई बार एक साथ लॉन्च कर दिए जाते हैं, तो वहीं कई बार हर सप्ताह एक एपिसोड लॉन्च होता है।
कंटेट होता है नया
टीवी चैनलों की बात करें या पिक्चर की कहानी साधारणतः एक ही मामले के इर्द-गिर्द कहानी घूमती रहती है। जबकि वेब सीरीज में कंटेट सबसे बड़ा शस्त्र है। यहां प्रोड्यूसर-डायरेक्टर को बोल्ड कंटेट से लेकर कई ऐसे मुद्दों पर सीरीज बनानी की छूट होती है जिन्हें फिल्मों या सीरियल्स में आमतौर पर नहीं दिखाया जाता। खासकर ये युवाओं के लिए एक बेहतर माध्यम है जो फिल्मों में नाच-गाने और फैमिली ड्रामे से अलग स्टोरिज देखना चाहते हैं।
सेंसर की कैंची का डर नहीं
पिक्चर्स में जब भी बोल्ड या एडल्ट कंटेट होता है तो प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को फिल्म का सेंसर बोर्ड से अटकने का डर रहता है। लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सेंसर जैसा कुछ नहीं है। हाल ही में अनुराग कश्यप की वेब सीरीज सेक्रेड गेम्स बहुत जिक्र में रहा। अनुराग कश्यप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि वो जब भी कोई पिक्चर बनाते हैं उसके बाद एक माह तक वो सेंसर बोर्ड के चक्कर लगाते रहते हैं जबकि वेब सीरीज रिलीज होने के बाद वो फ्री हैं और रिलैक्स महसूस कर रहे हैं।
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