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आज देशभर में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जा रहा है। जी हाँ, आपको बता दें कि भारत में हर साल 2 दिसम्बर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मानाया जाता है। इस मौक़ें पर बड़े शहरों से लेकर गाँवों-कूँचों तक ये जानना बेहद ज़रूरी होगा कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भारत में प्रदूषण नियंत्रण के कार्यान्वयन की सर्वोच्च संस्था है, क्योंकि वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 तथा पर्यावरण (सुरक्षा) अधिनियम, 1986 ने मिलकर इसके कार्यक्षेत्र को व्यापक बना दिया है। इस बोर्ड की स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियमः 1974 के अधीन सितम्बर, 1974 में की गई थी।
वास्तव में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये तत्कालीन भारत सरकार द्वारा उठाया गया यह क़दम बेहद सराहनीय और सरोकारी है। यह संस्था आज हरेक प्रकार के प्रदूषण को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था है। हालाँकि ये मूल रूप से जल प्रदूषण के नियंत्रण के लिए ही बनाई गयी थी। आइए राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के इस बेहद ख़ास मौक़े पर आपको भारत के 5 पर्यावरण नियंत्रण क़ानूनों के बारे में बता दें।
पहलाः
23 मार्च, 1974 को राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलने के बाद जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियमः 1974 लागू हुआ। इस अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत हरेक राज्य में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा केन्द्रीय स्तर पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई।
दूसराः
राज्य बोर्ड द्वारा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुये वर्ष 1977 में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) उपकर अधिनियमः 1977 पारित किया गया।
तीसराः
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिये वर्ष 1981 में वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण), अधिनियमः 1981 पारित हुआ। उपरोक्त प्रावधानों को वृहत स्वरूप देने तथा खतरनाक रसायनों तथा अपशिष्टों को ध्यान में रखते हुये सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 लागू किया।
चौथाः
19 नवम्बर, 1986 से लागू पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियमः 1986 का कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक है तथा पर्यावरण संरक्षण के सभी महत्त्वपूर्ण अंगों को ध्यान में रखते हुये केन्द्रीय सरकार को व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
पाँचवाः
ख़तरनाक औद्योगिक प्रक्रियाओं से बढ़ते ख़तरे एवं दुर्घटनाओं को ध्यान में रखकर लोक दायित्व बीमा अधिनियमः 1991 लागू किया गया। जिसमें खतरनाक रसायनों और अपशिष्ट के उपयोग तथा विसर्जन से सम्बन्धित निर्देश हैं।
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