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सैलेरी एक ऐसा शब्द है जिसका नाम सुनकर ही एक फीलिंग जाग जाती है। इसके बाद आपको पूरा महीना देखना होता है, कि आपके पास क्या बचेगा क्या नहीं। सैलेरी कोई शब्द नहीं एक फीलिंग है। आपको बता दें कि सैलेरी आने कि जितनी खुशी होती है उतना ही गम उसके जाने का होता है।
साथ ही जिस दिन सैलेरी आती है उस दिन आपसे बड़ा राजा कोई नहीं होता है, लेकिन जब धीरे-धीरे ये खत्म होने लगती है और साथ ही आपको कम पैसों पर जीना पड़ता है तो तब नानी याद आती है।
तो जानिये सैलेरी आने से लेकर उसके जाने तक की कहानी...
सैलेरी का दिन...
जिस दिन सैलेरी आने वाली होती है उस दिन पूरे ऑफिस में एक अजीब माहौल होता है। हर जगह हसी खुशी का आलम होता है। सब लोग ये तैय कर रहे होते हैं कि सैलेरी क्रेडिट होने के बाद क्या किया जाएगा।
जब सैलेरी वीली मेसज आता है...
महीने में सिर्फ एक ही दिन ऐसा होता है जिस दिन आपको अपने आप पर गर्व फील होता है। ऐसा लगता है कि 'अपुन ही भगवान है'।
वो तीन जादुई शब्द...
वो तीन जादुई शब्द जिन्हें सुनकर आपके दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। वो तीन शब्द जिन्हें सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते। वो तीन शब्द जो हर किसी की ज़िंदगी में एक नया रंग भर देते हैं। सेलेरी इज़ क्रेडिटेड...
फिर धीरे-धीरे वो समय आता है...
फिर टाइम आता है जब आपको सब कुछ महंगा लगने लगता है। आप परेशान हो जाते हैं। आपके पास कुछ नहीं बचता है, आपको आजीब सी गरीब सी फीलिंग आती है।
फिर उधारी...
इस दौरान आपको अपने सारे अच्छे दोस्त याद आते हैं और उन दोस्तों को आपकी यादआती है। लेकिन क्यों? उधारी के लिए भाई...
महीने के आखिरी दिन...
इस समय तो ऐसा लगता है जैसे सब कुछ खत्म होने वाला है। सब बर्बाद हो गया है, कुछ नहीं बचा है। आप को गरीबी फील होने लगती है। 10 रुपय की चाय भी महंगी लगती है।
Author- Anida Saifi
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