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हमारे समाज में गोरी रंगत को सुंदरता का पैमाना माना जाता है, ऐसे में जिन लोगों की रंगत थोड़ी भी गहरी होती है, वे गोरे दिखने के प्रयास में लगे रहते हैं... और लोगों की इसी सोच का फायदा उठाती हैं ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां। फेयरनेस क्रीम के जरिए गोरा बनाने का दावा कर ऐसी कंपनियां हर साल करोड़ों का बिजनेस कर जाती हैं, जबकि इसकी भरपाई करनी पड़ती है उन लोगों को जो इसके झांसे में आते हैं।
दरअसल, फेयरनेस क्रीम भले ही आपकी स्किन की रंगत थोड़े देर के लिए हल्की कर दें पर इसका इस्तेमाल आपकी त्वचा के लिए बेहद नुकसानदायक होता है, यहां तक कि इसके लगातार प्रयोग से स्किन कैंसर जैसी घातक समस्या हो सकती है।
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी ज्‍यादातर फेयरनेस क्रीमों में हाइड्रोक्योनोन, स्टेरॉयड, क्लोबेटासोल, और बेटामेटनासोन होते हैं, ऐसे में इस तरह की क्रीम का लंबे समय तक इस्तेमाल त्वचा पर घातक प्रभाव डालता है। चलिए आपको फेयरनेस क्रीम के तत्वों के हिसाब से इसके नुकसान के बारे में समझाते हैं...
• हाइड्रोक्योनोन से चेहरे पर लाल चकते होना, जलन, खून निकलने से लेकर स्किन कैंसर का खतरा हो सकता है।• बेटामेटनासोन से खुजली, , रूखापन, स्किन में जलन जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।• क्लोबेटासोल से मुहासे होना, अनचाहे बाल और चेहरे पर गड्ढे पड़ जाते हैं• फ्लूओसीलोन से खुजली, रूखेपन और चेहरे पर अनचाहे बाल उग आते हैं।
वहीं फेयरनेस क्रीम के इस्तेमाल से आपकी स्किन फोटो सेंसिटिव भी हो जाती है। दरअसल, जब लंबे समय तक ऐसी क्रीम का इस्तेमाल करते हैं तो आपकी स्किन पर मौजूद पॉर्स बन्द हो सकते है, ऐसे में इससे स्किन पहले से कहीं सेंसटिव हो जाती है। यहां तक कि इसे सूरज की रौशनी से भी नुकसान पहुच सकता हैं। इस कंडिशन को फोटो सेंसिटिविटी के रुप में जाना जाता हैं।
जाहिर है फेयरनेस क्रीम का प्रयोग आपकी स्किन के लिए बेहद घातक है, इसलिए आगे से इसके प्रयोग से पहले आप सावधान रहें।
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