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देश-दुनिया में दिल के मरीजों की संख्या में तेजी से बढोत्तरी हो रही है, ये शायद बदलती लाइफस्टाइल का असर है कि बुजुर्गों के साथ ही युवाओं में भी दिल सम्बंधी बीमारी का खतरा दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। साथ ही इससे होने वाले मौत की संख्या भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे में इस घातक बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी हैं, क्योंकि पता नहीं कब कौन इसका शिकार हो जाए और सबसे अधिक जरूरी है कि इसके प्राथमिक उपचार के बारे जानना। जी हां, अगर हार्ट अटैक पड़ते ही मरीज को सही उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ त्वरित उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे हार्ट अटैक पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
लक्षणों को पहचान कर व्यक्ति का उपचार तुरंत शुरू करें
जी हां, इसके लिए सबसे अधिक जरूरी है कि आप हार्ट अटैक के लक्षण पहचान सकें, ताकी अगर आपके पास में किसी व्यक्ति को अचानक से ऐसी समस्या हो तो आप उसे जरूरी सहूलियता या उपचार दें सकें। तो आपको बता दें कि दिल का दौरा पड़ने के शुरूआती लक्षणों है... सीने में जकड़न, सांसों का तेजी से चलना या सांस फूलना, कंधों के साथ जबड़ों में फैलता दर्द, चक्कर आना, पसीने छुटना, नब्ज कमजोर पड़ना... इनमें से कोई लक्षण दिखते ही सबसे पहले तो आप मरीज को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने का प्रबंध करें और उसी के साथ उसका त्वरित उपचार शुरू कर देँ।
मरीज का सिर नीचा कर लिटा दें
हार्ट अटैक के संकेत मिलते ही सबसे पहले आप मरीज को आरामदायक स्थिति में लिटा दें और कोशिश करें कि उसका सिर थोड़ा नीच रहे। इससे उसके बॉडी में ब्लड की सप्लाई हार्ट की तरफ होगी जो कि बेहद जरूरी है।
एस्प्रीन की टेबलेट दें
जी हां, हार्ट अटैक के मरीज को तुरंत एस्प्रीन की टेबलेट चूसने को दें, एस्प्रीन के सेवन से दिल का दौरा पड़ने पर मृत्यु दर 15 प्रतिशत तक कम हो जाती है। दरअसल, एस्प्रीन शरीर में खून के थक्‍के बनने की प्रक्रिया को रोक देती है है इससे रक्त संचार बना रहता है और व्यक्ति के जीवित रहने की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं।
सीपीआर दें
हार्ट अटैक में मरीज की धड़कने बंद हो सकती हैं, ऐसे में ध्यान रहें कि ऐसा ना हो पाएं इसके लिए आप हास्पिटल पहुंचने तक उसे सीपीआर दें। इसके आप लिए मरीज को कमर के बल लिटा कर उसके सीने को अपनी हथेंलियों से एक से लेकर आधा इंच दबाएं। ऐसा आपको प्रति मिनट लगभग सौ बार करना है। यानी ऐसा जल्दी जल्दी करें और तब तक करते रहे जब तक मरीज को मेडिकल ट्रीममेंट नहीं मिल जाती है।
कृत्रिम सांस दें
अगर सीपीआर से भी बंद धड़कने शुरू नहीं होती हैं, तो आप मरीज को कृत्रिम सांस दें... इसके लिए मरीज की नाक को अपनी उंगलियों से दबाकर उसके मुंह में अपने मुंह से कृत्रिम सांस दें। ऐसा करने से मुंह से दी जा रही सांस मरीज के फेफड़ों तक पहुंचेगी।
ऐसे में अगर हार्ट अटैक के 15 मिनट के अंदर मरीज को इस तरह से उपचार मिल जाये तो उसकी जान बचाई जा सकती है, वरना कभी-कभी इस उपचार में देर हो जाने से एंजीयोप्‍लास्‍टी भी काम नहीं कर पाती।
Author: Yashodhara Virodai
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