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आजकल आप अपने चारो ओर नज़रें घुमाकर देख लीजिये आपको इतने हाई टेम्पर्ड लोग मिलेंगे कि उनसे समाज में सभ्यता का प्रदूषण पैल रहा है, क्योंकि ऐसे लोग दूसरे लोगों से असभ्य व्यवहार कर बैठते हैं। वास्तव में उनके ऐसा करने का कारण है उनमें सहनशीलता की भारी कमी का होना। जी हाँ, आजकल लोगों में सहनशीलता बिल्कुल ख़त्म सी हो गयी है। हर एक छोटी सी छोटी बात पर लोग सामने वाले को का जाना चाहते हैं। उनमें बर्दाश्त करने की क्षमता घटी है। इसलिए अच्छे समाज का निर्माण करने के लिए व्यक्ति का सहनशील होना बड़ा ज़रूर है। तो आइए आज हम आपको सहनशील बनने के लिए मूलाधार चक्र का उपयोग करने के बारे में बताते हैं।
मूलाधार चक्र जननेद्रिय और मलद्वार के बीच होता है। यह चक्र प्रजनन अंगों, प्रतिरक्षा प्रणाली, और बड़ी आँत की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करता है। इसकी निष्क्रियता से आलस्य , मोटापा, गठिया, सूजन और तनाव आदि की समस्या होती है। मूलाधार चक्र की सक्रियता से कुँडलिनी जागरण होती है। व्यक्ति युवा महसूस करता है और उसमें स्थिरता और सहनशीलता के गुण विकसित होते है।
मूलाधार चक्र को साधने के लिए आप सीधए लेटकर दोनों हाथों के अँगूठों को शेष उँगलियों के बीच दबाकर मुट्ठियाँ बना लें। अब धीमी गहरी श्वास भरते हुये गुदामार्ग को सिकोड़ें और साँस छोड़ते हुए गुदामार्ग को ढीला छोड़ दें। इसे सुबह-शाम पाँच-पाँच मिनट करें।
Author: Amit Rajpoot
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