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हमारा शरीर पञ्च महाभूतों से मिलकर बना है। इसमें क्षिति (पृथ्वी), जल (पानी) पावक (अग्नि), गगन (वाष्प या बादल) और समीर (हवा) का सम्मिश्रण है। इन पाँचों महातत्वों में भी सबसे अधिक जो तत्व हमारे शरीर के निर्माण में योगदान देता है, वह है पानी। जी हाँ, हमारे शरीर और रक्त का 70-80 फीसदी हिस्सा जल ही है। इसमें थोड़ी सी भी कमी अवसाद, उदासी, निष्क्रियता और नकारात्मक विचारों आदि का कारण बनती है। सोहम मुद्रा इस कमी को पूरा करके हमारी मानसिक शक्ति को बढ़ाती है। सोहम मुद्रा हमारे भीतर नई तरह की ऊर्जा, आत्मविश्वास और उत्साह पैदा करती है। इसका आसन लगाना बेहद आसान है।
सोहम मुद्रा का आकार लेने के लिए सबसे पहले आप अपने दोनों हाथों को अपने जाँघों पर रखकर अँगूठे के शीर्ष को कनिष्ठा उँगली की जड़ में लगाएँ। अब धीरे-धीरे श्वास को अंदर भरें और इसी मुद्रा में अब मुट्ठी बना लें। इसके बाद अब आपको ऊँ की लंबी ध्वनि तक़रीबन सात बार करनी है। ध्यान रहे कि आपको इस धवनि को सात बार सुनना है।
अब धीरे-धीरे साँस बाहर करते हुए पेट की मांसपेशियों को संकुचित करें और उड्डियान बंध लगाएँ अब अपने हाथ खोलकर अपने हाथ-पैरों को तानें और कल्पना करें कि आप अवसादमुक्त हो रहे हैं। ऐसा 7 से 49 बार तक आपको करना है।
Author: Amit Rajpoot
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