Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
जीवन में सुकून और सहजता बेहद जरूरी है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है, क्योंकि कई बार इस सहजता के चक्कर में हमारे जीवन का असली मकसद कहीं पीछे रह जाता है। जी हां, समय की धारा के साथ बहना तो अच्छा है पर इस धारा के भंवर में ना फंसे क्योंकि जीवन का मतलब आगे बढ़ना है ना कि कहीं रूक जाना। इसलिए बेहतर यही है कि सही समय पर इस कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकला जाए... हालांकि ये आसान नहीं है कि पर ये मुश्किल भी नहीं है... और आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि कब और किस तरह से इससे बाहर निकला जाए।
यूं पहचाने कि फंस चुके हैं कम्फर्ट जोन के भंवर में
जी हां, सबसे पहले तो आपको इस स्थिति का आकंलन करना होगा कि आप इस कम्फर्ट जोन के भंवर में फंस चुके हैं। जैसे कि
मजे की जॉब
मजे की जॉब करना या अपने काम में मजे लेना तो अच्छी बात है पर ध्यान रहें कहीं आपने जानबूझ कर तो ऐसी जॉब नहीं ज्वाइन की है, जिसमें आपको अपनी प्रतिभा और क्षमता का कम इस्तेमाल करना पड़े, या फिर आप अपने काम में अपने टैलेंट को उतना ही प्रयोग कर रहें जिससे कि आपका काम चल जाए, जबकि आपको पता है कि आप इससे अच्छा कर सकते हैं, पर आप अधिक मेहनत से बच रहे हैं। हो सकता है ऐसा आप सुकून पाने के लिए कर रहे हैं, लेकिन जरा सोचिए सुकून के चक्कर में आप अपनी प्रतिभा को छुपा रहे हैं, जबकि आप इसके जरिए जीवन में नई ऊचाईंयो को छू सकते हैं।
कल कर लेंगे
या फिर आप अपने काम को कल पर टाले जा रहे हैं... आप बहुत दिनों से कुछ करने की सोच तो रहें हैं पर उसके लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। बस जो चल रहा चलने दें रहें हैं, ये सोचकर की मेहनत वाला काम कल किया जाएगा। अगर आप ऐसी किसी बहानेबाजी से खुद को ही तसल्ली देने में लगें हैं, तो समझ लीजिए कि आप अपने कम्फर्ट जोन के भंवर में फंस चुके हैं।
ऐसे निकले कम्फर्ट जोन से बाहर
मशीनी जिंदगी को कहें बाय- जी हां, अक्सर नौकरी पेशा में रहते हुए लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मशीन जैसी हो जाती है, आप बिना सोचे-समझे एक रूटीन लाइफ जीते जाते हैं, आप अपने आज में इतने व्यस्त होते हैं कि आने वाले कल के बारे में बिलकुल भी नहीं सोचते हैं। अगर आप भी ऐसी ही मशीनी जीवनशैली की शिकार बन चुके हैं, तो सबसे पहले तो इससे बाहर निकलनें की कोशिश कीजिए। क्योंकि जब आप इससे बाहर निकलेंगे तभी आप नए लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ सकेंगे।
अपनी क्षमता को पहचाने
कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने के लिए सबसे जरूरी है कि आप अपनी क्षमता को पहचाने और उसके अनुसार अपने गोल सेट करें।
सोच-समझ का दायरा बढ़ाएं
वैसे कई बार लोगों को अपनी सही क्षमता का पता भी नहीं चलता है, और वो तालाब के मेढ़क बने रहते हैं, लेकिन आपको ये समझना होगा कि जब आप अपने बनाए दायरे से बाहर निकलेंगे तो समझ पाएंगे कि वास्तव में दुनिया क्या है और आपकी उस दुनिया में क्या जगह है। इसलिए अपनी सोच, समझ और क्षमताओं का विस्तार करें।
लेना होगा रिस्क
जी हां, कभी-कभी लाइफ में रिस्क लेना भी जरूरी होता है, क्योंकि जबतक आप ऐसे रिस्क सामना नहीं करेंगे आपको अपनी क्षमता का पता ही नहीं चलेगा। इसलिए खुद पर विश्वास रखते हुए जीवन कुछ नया करने की ठाने और उस अमल करें।
अपनी चाहतों को करें पूरा
लाइफ में हम चाहते तो बहुत कुछ हैं, पर परिस्थितियों के जाल में फंस कर कभी वो सब नहीं कर पाते जो चाहते हैं। लेकिन परिस्थितियों के इस भंवर से बाहर निकले और वो सब कुछ करें जो आप कर सकते हैं और जो करना चाहते हैं। फिर देखिए ये दुनिया आपकी होगी।
Author: Yashodhara virodai
YOUR REACTION
  • 10
  • 51
  • 7
  • 9
  • 12
  • 7

Add you Response

  • Please add your comment.