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हमारे जीवन में किसी न किसी से हमारा किसी न किसी तरह का कोई न कोई झगड़ा ज़रूर चलता रहता है। कई बार ये झगड़ा मान सम्मान का होता है, तो कई बार लाभ के पदों का। ऐसे हर मामले में झगड़े के कई अलग-अलग कारण मिल जाते हैं, जिनके कारण हम आपसी द्वेष को बढ़ा लेते हैं। हालाँकि दिलचस्प बात यह है कि ये झगड़े कोई एक दिन में अचानक नहीं पैदा हो जाते हैं। बल्कि ये रोज़मर्रा के जीवन में छोटी-छोटी चीज़ों से पैदा होकर एक दिन बड़ा स्वरूप धारण कर लेते हैं। वरना कोई नहीं चाहता है कि उसके जीवन में उसका किसी से भी कोई झगड़ा हो। बहरहाल, आइए हम आपको बता दें कि वास्तव में झगड़े की तीन वजहें कौन स होती है।
ज़रः
इस मामले में ज़र यानी की धन या सम्पत्ति अथवा मूल्य पहला ऐसा कारण होता है जिसकी वजह से झगड़े पनपते हैं। समाज में झगड़े का यह मुख्य कारण माना जाता है, क्योंकि सम्पत्ति के कारण ही झगड़ों में सबसे अधिक बहुलता देखी जाती है।
जोरूः
झगड़े के दूसरे बड़े कारण में आती हैं जोरू यानी कि पत्नियाँ। जी हाँ, पत्नियों का झगड़े का कारण माना गया है। यानी कि पत्नियों के किसी न किसी चीज़ में दखल या स्वयं उन्हें पाने की कोशिशों से प्रायः झगड़े जन्म ले लेते हैं।
ज़मीनः
झगड़े का तीसरा कारण ज़मीन है। ये अधिकतर पारिवारिक झगड़े का प्रधान कारण है। हमारे यहाँ ज़मीन के झगड़े हरेक गली-चौराहे या मोहल्ले में आपको सुनने को ज़रूर मिल जायेंगे।
Author: Amit Rajpoot
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