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पिता आपके पास एक ऐसी जागीर होते हैं, जो हर हाल में आपके लिए क़ीमती होते हैं। हालाँकि आज हम अपने समाज में प्रायः यह देखते हैं कि बेटे की सफ़लता के बाद कोई न कोई ऐसे कारण आन पड़ते हैं, जिनके कारण हम अपने पिता से दूरियाँ बनाने लग जाते हैं। जबकि किसी भी सूरत में ऐसा नहीं होना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं है कि आप जब अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ते हैं तो सभ्यता कुछ आगे खिसकती है।
ऐसे में बहुत ही मुमकिन होता है कि पिता और आपके सोचने और समझने में अलगाव होता है और यह भी तय ही होता है कि आप समसामयिक होते हैं, जबकि पिता पुराने ही ढर्रे में रहते हैं। बावजूद इसके पिता के साथ समन्वय स्थापित करने में आपकी ही भूमिका अधिक आवश्यक होती है। इसलिए अपने पिता के साथ आप भूलकर भी ये 3 निम्लिखित बर्ताव कभी न करें।
अभिवादन कम न करेः
अक्सर जब आप कर्मों में पिता के आगे निकल जाते हैं तो समाज में बढ़ती आपकी प्रतिष्ठा आपके पिता को भी अपने मायने से देखने लगती है। इससे आप अपने पिता को भी अपने से कमतर समझने लगते हैं और फिर आप अपने पिता का अभिवादन पहले से कम कर देते हैं। इससे बचें।
बात करना कम न करेः
हैरानी की बात है कि कभी हर बाद अपने पिता से पूछने वाले लोग एक समय के बाद उनसे बात करना कम कर देते हैं या फिर बंद ही कर देते हैं। ऐसे लोगों को लगने लगता है कि उनके पिता अब उनसे बात करने के योग्य नहीं रहे और फिर वो धीरे-धीरे अपने पिता को इग्नोर करने लगते हैं। ऐसा करने वाले लोगों को हालाँकि यह चाहिए कि वो पिता के स्तर में जानक उनके रुचि की बातें उनसे करें।
कोई राज़ न छुपायेः
अपने पिता के साथ हमें किसी तरह का राज़ नहीं छुपाना चाहिए। विपरीत परिस्थियों में वही आपको उससे निकालते हैं अथवा आपके स्वयं निकल पाने में वो औरों से अधिक आपको प्रेरित करते हैं।
Author: Amit Rajpoot
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