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वैसे तो, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकांश लोगों को सिरदर्द की समस्या रहती है, पर स्वास्थ्य सम्बंधी आकड़ों की माने तो पुरुषों की तुलना में महिलाएं कहीं अधिक इसका शिकार होती हैं। जी हां, हाल ही में एक स्वास्थ्य सर्वे की माने तो आज के समय में देश में तकरीबन एक तिहाई महिलाएं तेज सिर दर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं से ग्रस्त हैं, जबकि वहीं पुरूषों में ये आकड़ा 1/5 का है, यानी कि पुरुषों का पांचवां हिस्सा सिरदर्द से पीड़ित है। दरअसल, इसके पीछे बहुत सी व्यहारिक वजहे हैं जैसे कि...
हार्मोनल बदलाव
जी हां, महिलाओं में अधिक सिरदर्द का एक बड़ा कारण उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव होते हैं। जैसे कि एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन में बदलाव के कारण महिलाओं में माइग्रेन की समस्या होती है। यही वजह है कि पीरियड्स में अनियमितता के कारण भी माइग्रेन और सिरदर्द की समस्या होती है, साथ ही कुछ महिलाओं में प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने में माइग्रेन की समस्या काफी गंभीर हो जाती है।
भागदौड़ भरी जीवनशैली
जी हां, महिलाओं में अधिक सिरदर्द की समस्या का कारण उनकी भागदौड़ भरी जिंदगी भी हैं, पुरूषों की तुलना में महिलाओं को घर-गृस्थी का काम अधिक सम्भालना पड़ता है, वहीं अगर महिला वर्किंग है, तो फिर उसकी जिम्मेदारी दोहरी हो जाती है, ऐसे में जब काम के बोझ के कारण दिमाग पूरी तरह से थक जाता है, तब भी सिर में भारीपन और दर्द की समस्या होने लगती है।
तनाव लेना
महिलाएं में ज्यादा सिर दर्द का कारण उनका तनाव भी होता है, महिलाएं अधिक संवेदनशील होती हैं, ऐसे वो तनाव भी अधिक लेती है, जो कई बार उनके सिर दर्द का कारण बन जाता है।
अनियमित खान-पान
जी हां, सिरदर्द के पीछे सिर्फ दिमागी और मानसिक स्थिति ही जिम्मेदार नहीं होती है, बल्कि खराब पाचन के कारण भी सिर दर्द की समस्या होती है। खासकर महिलाएं परिवार की देखरेख करते-करते अपने खान-पान की पूरा ख्याल नहीं रख पाती हैं, ऐसे में पेट की समस्याओं के साथ ही सिर दर्द की समस्या भी उन्हें अपना शिकार बना लेती हैं।
जी हां, ये सारे वो कारण हैं जिनके कारण आज ज्यादातर महिलाएं सिर दर्द और माइग्रेन से परेशान रहती हैं, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बचपन में लड़कों और लड़कियों दोनों में ही माइग्रेन के खतरे के संयोग बराबर रहते हैं, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता है महिलाओं में माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है... खासकर 20 से 45 वर्ष की महिलाओं को ये अधिक प्रभावित करता है। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि वो अपने खान-पान पर पूरा ध्यान दें और तनाव मुक्त जीवनशैली जीने का प्रयास करें।
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Author: Yashodhara Virodai
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