Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
हर समय काल में ऐसे बहुत से लेखक और शायर हुए हैं जिन्होने अपनी बेबाक लेखनी के जरिए समाज को आईना दिखाया हैं और आज के समय में राहत इंदौरी ये काम बड़ी बाखूबी से करते हैं। वो सिर्फ शब्दों के ही जादूगर नहीं हैं, बल्कि उनकी हर शायरी असलियत से वास्ता रखती है और जिंदगी का फलसफा बयां करती हैं। ऐसी ही कुछ चुनिंदा शायरी हम आपके लिए लेकर लाएं हैं...
बहुत हसीन है दुनिया
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखोज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखोउस आदमी को बस इक धुन सवार रहती हैबहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूंबहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने परजो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं
अंदर का ज़हर चूम लिया
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गएकितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गएकॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिएचारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी हैकहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसेजहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे
मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए
रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता हैचाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता हैहम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगेकम से कम राह के पत्थर तो हटाते जातेमोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिएऔर सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूं हैं
एक चिंगारी नज़र आई थी
नींद से मेरा ताल्लुक़ ही नहीं बरसों सेख़्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यूं हैंएक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसेवो अलग हट गया आँधी को इशारा कर केइन रातों से अपना रिश्ता जाने कैसा रिश्ता हैनींदें कमरों में जागी हैं ख़्वाब छतों पर बिखरे हैं
फूलों की दुकानें खोलो
जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो देमैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो देफूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करोइश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो
Author: Yashodhara Virodai
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 1
  • 1
  • 0
  • 1

Add you Response

  • Please add your comment.