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छोटे पर्दे से बड़े पदे पर रूख करने वाले सितारों की लिस्ट में ‘पवित्र रिश्ता’ फेम एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे का नाम भी शुमार हो चुका है, जो कि बहुत जल्द कंगना रनौत की अपकमिंग फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' से अपना बॉलीवुड डेब्यू करने जा रही हैं। गौरतलब है कि इस फिल्म में अंकिता, झलकारी बाई के किरदार में नजर आने वाली है, जिसका पहला लुक हाल ही में सामने आया है, हालांकि अंकिता और फिल्म की टीम ने अभी तक इस किरदार के बारे में लुक के अलावा कोई खुलासा नहीं किया है। दरअसल, अंकिता जिस झलकारी बाई के किरदार को पर्दे पर जीवंत करने जा रही है, वो अपने आप में बेहद खास है, एक तरह से ये फिल्म का सेकेंड लीड कैरेक्टर है और इस किरदार की अपनी दिलचस्प कहानी है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।
जैसा कि फिल्म 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' ऐतिहासिक पृष्ठ भूमि पर आधारित है, जिसमें कंगना रौनत रानी लक्ष्मीबाई के किरदार में नजर आने वाली है.... वैसे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में तो हम सभी जानते हैं, कि किस तरह से उन्होने ब्रिटिश सम्राज्य से लोहा लिया था और आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन इस क्या आप जानते हैं झलकारी बाई के बिना रानी लक्ष्मीबाई का ये ऐतिहासिंक जंग की कहानी अधूरी है, जी हां... और इसी ऐतिहासिक किरदारे को पर्दे पर जीवंत करने जा रही हैं... अंकिता लोखंडे।
असल में झलकारी बाई, रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना ‘दुर्गादल ‘की सेनापति होने के साथ उनकी विशेष सलाहकार थीं, जो काफी कुछ लक्ष्मीबाई की तरह ही दिखती थीं, ऐसे में आखिरी समय में झलकारी ने रानी का भेष धर अंग्रेजो का चकमा दिया और अपनी जान की बाजी लगा कर इस लड़ाई मे अहम भूमिका निभाई थी।इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर 1830 को झाँसी भोजला गांव में एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन में ही मां के देहांत होने के बाद उनके पिता ने उनका पालन पोषण एक लड़के की तरह किया... उन्हें घुड़सवारी और हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया। हालांकि उस समय की सामाजिक परिस्थितियों (जातिवाद) के कारण उन्हे किसी तरह की प्रारम्भिक शिक्षा तो नहीं मिल पाई, पर वो पिता की देख-रेख में एक कुशल योद्धा जरूर बन गई।
किशोरावस्था में ही उनका विवाह झांसी राज्य में तोपची के रूप में कार्यरत सैनिक पूरण सिंह से हुआ। इसके बाद पुराण सिंह ने ही झलकारी बाई को रानी लक्ष्मीबाई से मिलवाया और फिर झलकारी भी रानी लक्ष्मीबाई की महिला सेना में शामिल हो गई। सेना में शामिल होने के बाद उन्होने युद्ध से सम्बंधित जरूरी अभ्यास किया और धीर-धीर वो एक कुशल सैनिक बनी। साथ ही वो रानी की विशेष सलाहकार भी बन गई और उन्हे राज्य के महत्वपूर्ण मामलों में सलाह देने लगी। वैसे झलकारी की जो सबसे खास बात थी, वो ये कि वो काफी कुछ रानी लक्ष्मीबाई जैसी ही दिखती थी और इसका फायदा तब हुआ जब रानी किले में चारों तरफ से अंग्रेजो से घिरी तो झलकारी ने रानी का भेष धर उन्हें बचा लिया।
असल में जब जनरल रोज ने विशाल सेना के साथ 23 मार्च 1858 को झाँसी पर आक्रमण किया तो रानी ने अपने 5000 सैनिको की टोली के साथ उसका जमकर सामना किया, लेकिन बाद में किसी भेदी के कारण अंग्रेज फ़ौज पीछे से झाँसी के किले में घुस गई, ऐसे में रानी को अंग्रेजो के चंगुल से बचाने के लिए झलकारीबाई ने खुद रानी का वेष धर आगे बढ़ गई, चूकि वो दिखती भी लक्ष्मीबाई की तरह थी, ऐसे में अंग्रेज सैनिक रानी समझ झलकारी को ही गिरफ्तार कर ले गए।
हालांकि झलकारी के अंत के बारे में इतिहासकारों में मतभेद है, कुछ लोग कहते हैं कि जब अंग्रेज उन्हे गिरफ्तार कर ले गए और उनसे पूछा गया कि उनके साथ क्या सलूक किया जाए तो उन्होने फांसी की मांग की जिसके सुन जनरल रोज दंग रह गया और उसने झलकारी को रिहा कर दिया, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अंग्रेजी सरकार किसी क्रांतिकारी को नहीं छोड़ती थी, ऐसे में उसने झलकारी बाई को भी मौत ही दी होगी। खैर जो भी हो झलकारी बाई अपना कर्तव्य तो निभा गई। हालांकि इतिहास में उन्हें वो जगह नहीं मिल पाई जिसकी वो हकदार थीं। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि इस फिल्म के बाद लोग झलकारी बाई के बारे में कितना जान पाते हैं।
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Author: Yashodhara Virodai
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