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हिंदी सिनेमा जगत में बहुत से ऐसे फनकार आएं हैं जिन्होने अपने गायिकी के हुनर के जरिए बेहतरीन नगमों की सौगात दी, इसमें स्वर्गीय मोहम्मद रफी का नाम सबसे पहले आता है, क्योंकि आज भी वे अपने गाए नग्मों और गीतों के जरिए वे लोगों के दिलों में बसते हैं। आज उनके जन्म दिवस के मौके पर हम उनके ऐसे ही कुछ सदाबहार नग्मों की सौगात आपके लिए लेकर आए हैं...
मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को पंजाब के एक निम्नवर्गीय परिवार में हुआ था, रफी साहब के बचपन का नाम 'फीको' था जिन्होने बचपन में तो संगीत की कोई तालीम नहीं ली, हां पर राह चलते एक फकीरों को सुनते हुए उसकी तरह राग जरूर अलापत थें और यही शायद गायिकी के लिए उनका प्रशिक्षण साबित हुआ। इसके बाद 13 साल की उम्र में उन्होने लाहौर में एक कार्यक्रम के दौरान उस समय के मशहूर अभिनेता 'के एल सहगल' के गानों को गाकर अपनी पहली पब्लिक परफॉर्मेंस दी थी। वैसे रफी साहेब के फिल्मी करियर की शुरूआत हुई 1944 में आई फिल्म 'गांव की गोरी' के साथ और इसके बाद तो हिंदी सिनेमा जगत में उनके तराने गूंजने लगे। पेश हैं उनके गाए बेहतरीन नग्में...
चाहुंगा मै तुम्हें सांझ सवेंरे
1964 में आई फिल्म दोस्ती एक अंधे और लंगड़े लड़के की प्रगाढ़ दोस्ती को बयां करता ये गीत आज भी लोगों के जुबान पर रहता है। मोहम्मद रफी की आवाज ने इस इमोशनल गाने को और भी संजीदा बना दिया है।
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बहारों फूल बरसाओं
हिंदी सिनेमा जगत के बेहतरीन रोमांटिक सॉंग में से है मोहम्मद रफी की आवाज में गाया बहारों फूल बरसाओं, जिसे साल 1966 में आई फिल्म सूरज में राजेंद्र कुमार और वैजयंती माला पर फिल्‍माया गया है।
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दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर
साल 1968 में आई फिल्म ब्रह्मचारी के इस बेहतरीन गाने को मोहम्मद रफी की आवाज ने अमर कर दिया। दरअसल, इस गाने के मुखड़े और पूरे अंतरें को रफी साहब ने एक ही सांस में गा गए थे। क्योंकि ऐसा करने की शर्त शम्मी कपूर ने उनके सामने रखी थी, जिसे रफी साहब ने एक सांस में गीत गाकर पूरा भी किया।
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आने से उसके आए बहार
साल 1969 में आई फिल्म जीने की राह ये गाना तो आज भी मशहूर है, खासकर शादी बारात में ये गाना तो अक्सर सुनने को मिल जाता है।
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चुरा लिया है तुमने जो दिल को
साल 1973 में आई फिल्म यादों की बारात का ये गाना तो आज भी सुपरहिट है, वैसे तो इस गाने के कई सारे रिमिक्स सामने आ चुके हैं, लेकिन जो बात आशा भोसले और मोहम्मद रफी की आवाज में गाए गाने में हैं वो किसी दूसरे में नहीं।
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क्या हुआ तेरा वादा...
मोहम्मद रफी की आवाज में फिल्म यादों की बारात का ही दूसरा गाना क्या हुआ तेरा वादा भी काफी मशहूर है।
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