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भेड़चाल में चलते चले जाने वालों की समाज में कोई भी अहमियत नहीं होती है। फर्ज़ कीजिए कि हज़ार भेड़ें एक झुण्ड में चली जा रही हों, तो फिर आप उनमें से कितनी भेड़ों को पहचान लेंगें या फिर आप उनमें से कितनी भेड़ों की यूएसपी को नोटिस कर सकते हैं। ये सब मनन करने वाली बात है। ज़ाहिर है कि आपके सामने यह परिणाम आयेगा कि उनमें से आप संभवतः आगे चलने वाली भेड़ के सिवाय किसी और को तनिक समझ ही न पायें। इसके अलावा भेड़चाल में चलते चले जाने का यह भी भारी परिणाम होता है, कि जिसके वास्ते आप चलते चले जा रहे हैं, वो कुएँ में कूदेगा तो फिर सारी भेड़ें उसी कुएँ में गिरेंगी और आप उनमें से एक भेड़ होना नहीं चाहते हैं, तो फिर आपको इन बातों पर ध्यान देना होगा।
भीड़ से अलग दिखने के लिए सबसे पहले आपको अपनी यूएसपी तलाशनी होगी, जो कि आपके अलावा कहीं और नहीं दिखेगी। इसके लिए आपको बाहर किसी से पूछताछ करने की ज़रूरत नहीं है और न ही किसी से काउंसिंल की ज़रूरत है।
आपको बता दें कि आप जो कुछ भी महसूस करते हैं और जो तरीक़ा उसे प्रदर्शित करने के लिए आपको ठीक लगता है उसे वैसे ही पेश कर दें। इसके लिए यह भी देखने की ज़रूरत नहीं है कि कोई और हूबहू उस चीज़ को कैसे प्रदर्शित कर गया है। आप अपने आप में मौलिक बने रहें, धीरे-धीरे यही आपको भीड़ से अलग बना देगी और आपको पता भी नहीं चलेगा।
Author: Amit Rajpoot
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