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बच्चों का मन-मस्तिष्क बेहद संवेदनशील होता है, जिस पर हर छोटी-बड़ी या अच्छी-बुरी बात का असर पड़ता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के सामने अपने व्यवहार के प्रति खासा सतर्क रहना चाहिए। खासकर बच्चों के सामने लड़ाई-झगड़ा, विवाद या हिंसा करने से तो बिलकुल भी बचना चाहिए, क्योंकि इन सबका बच्चों के मन-मस्तिष्क पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ता है और आगे चलकर इसका बड़े दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं।
दरअसल, हाल ही में किए गए एक शोध में ये बात सामने आई है कि जो बच्चे जितना अधिक हिंसा देखते हैं या उसका शिकार होते हैं उनमें गुस्सा, तनाव और अवसाद उतना ही अधिक होता है। वहीं ऐसे बच्चों में मानवता और भाईचारे की भावना भी कम हो जाती है। इसलिए बेहतर यही है कि अपने बच्चों के सामने ऐसा कोई भी हिंसक व्यवहार ना करें जो कि उन्हें मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाए।
अपने व्यवहार के साथ ही अभिभावको को बच्चों के आसपास के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे कि आजकल की डिजिटल दुनिया में बच्चों तक इंटरनेट के जरिए आसानी से हिंसक सामाग्री पहुंच रही है।
चोरी, मारपीट, हत्या या रेप जैसे जघन्य अपराधों की खबर टीवी और मोबाइल के जरिए बच्चों तक आसानी से पहुंच रही है। ऐसे में ये मां-बाप का दायित्व बन जाता है कि वे अपने बच्चों को ऐसी हिंसात्मक घटनाओं के प्रभाव से कैसे दूर रखे और साथ ही इसके प्रति बच्चों की मानसिक तौर पर मदद करें।
इसके लिए बच्चों से बात करनी बेहद जरूरी है, जबकि आजकल के अभिभावको के पास इसके लिए वक्त ही नहीं रहता है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आप का बच्चा ऐसे किसी भी हिंसात्मक व्यवहार का शिकार ना बने तो आपको उससे बात करनी होगी और उसे इस तरह की हिंसात्मक घटनाओं के प्रति सही रूप से जागरूक करना होगा। आपका मानसिक सहयोग आपके बच्चों के बहतर भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
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