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Global Warming के ख़तरे से आज हर देश परेशान हैं। माना कि कुछेक देश ऐसे भी हैं, जो Global Warming के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार नहीं है। इसके अलावा कुछ ऐसे भई देश हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी रूप में Global Warming के लिए सरोकार नहीं रखते हैं। बावजूद इसके कोई भी देश ऐसा नहीं है, जो Global Warming के ख़तरे को लेकर चिंतित हो। इसका एक सबसे बड़ा कारण यह है कि Global Warming एक ऐसी आग है, जो एक बार कहीं भी लगने पर पूरी पृथ्वी को तहस-नहस करने के लिए बलवती है। इसलिए Global Warming से सभी का एक साथ चिन्तित होना लाजमी ही है।
आपको बता दें कि न एक ऐसा Global Warming धीमी गति से बढ़ता हुआ एक बेहद विशाल ख़तरा है। यह धरती को दिन-ब-दिन गर्म ही करता चला जा रहा है। हैरानी है कि पिछले 150 सालों में Global Warming के कारण धरती के औसत तापमान में 0.8 डिग्री का इज़ाफ़ा हो गया है। पृथ्वी का ताप बढ़ने के क्रम में यह काफ़ी अधिक है। जी हाँ, आपको ये बता दें कि यदि पृथवी का तापमान एक डिग्री भी बढ़ जाये तो यहाँ तबाही आ सकती है।
इतना ही नहीं, आपको स्पष्ट करते चलें कि आज Global Warming का जो रेसियो चल रहा है या जो संभावना दिख रही है, उससे यह प्रतीत होता है कि आने वाले 100-150 सालों के अन्दर प्रथ्वी का तापमान एक डिग्री तक बढ़ सकता है। इसलिए यह और भी ज़्यादा डरावना और चिंता का विषय है।
आपको बता दें कि जब भी पृथ्वी के तापमान बढ़ने की बात की जाती है तो इसका मतलब यह है कि सम्पूर्ण पृथ्वी का सामान्य सतह का तापमान इतना हो जायेगा और समुद्रों का सामान्य सतही जल भी उतना ही गर्म हो जायेगा। वास्तव में इसके भयंकर परिणाम होंगे, यथा- सहारा के मरुस्थल पर जाना जैसे मौत को दावत देने के समान होगा।
Author: Amit Rajpoot
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