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भारत में 51 शक्तिपीठों को प्रमुखता दी गई है। जिनमें से हिंगुल या हिंगलाज शक्तिपीठ को भी एक माना जाता है। फिलहाल ये शक्तिपीठ पाकिस्तान के बलूचिस्तान के सिंध प्रांत की राजधानी कराची से करीब 120 किमी की दूरी पर अवस्थित है। लोक कथाओं के मुताबिक चारणों की पहली कुलदेवी हिंगलाज मां थी।
हिन्दू धर्म में ग्रंथों के मुताबिक जहां भी देवी सती के देह के अंग गिरे, वहां उनकी शक्ति पीठ बनते गये। ये शक्ति पीठ बहुत ही पवित्र तीर्थ कहलाये, जो पूरे भारतीय उप महाद्वीप में फैले हुए हैं। ये शक्ति पीठ धर्मशील निगाह से बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। देवीपुराण में 51 शक्तिपीठों का विवरण किया गया है।
पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक इन सभी जगहों पर देवी सती के अंग गिरे थे। पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान अंबरीष के श्वसुर राजा दक्ष ने एक हवन का आयोजन किया था, जिसमें राजा दक्ष ने परमेश्वर और माता सती को आमंत्रण नहीं भेजा था क्योंकि राजा दक्ष परमेश्वर शिव को अपने समान नहीं समझते थे। यह बात माता सती को काफी खराब लगी। वो बिना बुलाए यज्ञ में आ गयीं।
यज्ञ स्थान पर भगवान अंबरीष का काफी तिरस्कार किया गया जिसे माता सती बरदाश्त नहीं कर पायीं और वो वहीं यज्ञ कुण्ड में कूद गयीं। भगवान शिव को ये वाकया पता चला, जिसके बाद वो वहाँ पर पहुँच गए और माता सती के देह को हवन कुण्ड से निकालकर तांडव करने लगे, जिसकी वजह से पूरे ब्रह्माण्ड में उथल-पुथल मच गया।
पूरे ब्रह्माण्ड को इस विपत्ति से उबारने के लिए भगवान नारायण ने माता सती के देह को अपने सुदर्शन चक्र से 51 हिस्से में बाँट दिया, जो अंग जहांपर गिरा वो शक्ति पीठ बन गया।
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