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भारतीय महिलाएं पारंपरिक परिधान में बेहद ही खूबसूरत लगती हैं और उनकी इस खूबसूरती में उस वक्त चार चाँद लग जाता है जब महिलाएं श्रृंगार करती है और गहने पहनती हैं।
हालांकि, इस खुबसूरती में सिर से लेकर पांव तक गहने पहनने का रिवाज है। जहां माथे पर टिका, कानों में झुमका, नाकों में नथिया, गले में मंगल सूत्र, हाथों की उंगुली में अंगूठी पहनती हैं। वहीं पैरों में पायल पहनती है। इस रिवाज में एक चीज़ कॉमन है और वो पायल है। जी हां, ऐसा आपने अक्सर देखा होगा कि महिलाएं पाँव के पायल को छोड़कर सभी जगह स्वर्ण आभूषण पहनती हैं।
जबकि पैरों की पायल चांदी की पहनती है। ऐसा क्यों है, क्या कभी आपने इस बारे में सोचा है ? अगर नहीं, तो आज हम आपको आभूषण पहनने के रिवाज के बारे में बताने जा रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पीला रंग भगवान श्री हरि विष्णु को अति प्रिय है।
इसलिए महिलाएं सोने से अपना श्रृंगार करती है। जिससे भगवान विष्णु अति प्रसन्न होते हैं और महिला के घर में सुख शांति और धन देते हैं। माता लक्ष्मी धन की देवी है। अतः माता लक्ष्मी भी प्रसन्न होती है। वहीं, शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि स्वर्ण आभूषण को कभी भी नाभि के नीचे नहीं पहनना चाहिए।
अगर कोई महिला ऐसा करती है तो इससे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु अप्रसन्न हो जाते हैं। ऐसे में स्वर्ण आभूषणों को पैरों में नहीं पहना जाता है। जबकि चांदी को शीतलता का रूप बताया गया है।
अतः इसे पहनना शुभ होता है क्योंकि यह कामकाजी महिला को मानसिक और शारीरक तौर पर शांत और शीतल रखता है। ऐसे में महिला को हमेशा चांदी के ही पायल पहनने चाहिए। इससे न केवल भगवान श्री हरि विष्णु प्रसन्न होते हैं बल्कि घर में भी सुख शांति आती है।
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