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प्यार पाने के लिए लोग क्या से क्या नहीं कर बैठते हैं। कोई अपनों से झगड़ बैठता है तो कोई उन्हें छोड़ देता है। कभी-कभी तो लोग घर-बार भी छोड़ देते हैं अपने प्यार को पाने और अपनाने के चक्कर में। लेकिन आज जो कहानी हम आपके साझा करने जा रहे हैं, ये ज़रा सा हटकर है और थोड़ा चौंकाने वाली भी। जी हाँ, आज हम आपको एक ऐसे मोहब्बत के क़िस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें आशिक़ ने एक नहीं, दो नहीं, तीन भी नहीं, पूरे आठ देशों को पार करके अपनी मोहब्बत को पाने के लिए भारत से स्वीडेन पहुँच गया। जी हाँ, एशिया में बसे भारत से ये मोहब्बत का योद्धा उत्तरी एशिया में बसे देश स्वीडेन तक साइकिल चलाकर पहुँच गया। आइए आज आपको इस आशिक़ की कहानी बताते हैं।
बात साल 1978 की है। दिल्ली में एक आर्ट मेला लगा था। यहाँ उड़ीसा के रहने वाले कलाकार पीके महानंदिया 10 मिनट में लोगों की पेंटिंग तैयार कर रहे थे। वहाँ उड़ीसा की रहने वाली मिस चैरलॉट उनके सामने आकर खड़ी हो गयीं, जो पीके महानंदिया के अपनी पेंटिग बनवाना चाहती थीं। महानंदिया को चैरलॉट से प्यार हो गया और उन्होंने चैरलॉट को उड़ीसा घूमने का आमंत्रण दिया।
इसके बाद चैरलॉट पीके महानंदिया के साथ उनके राज्य उड़ीसा घूमने गयीं। वहाँ साथ में घूमते-घूमते इन दोनों का प्यार वरवान चढ़ गया और दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे। आपको बता दें कि चैरलॉट के पीके महानंदिया को चाहने का कारण उनका हुनर और कोणार्क मंदिर था। जी हाँ, दिलचस्प है कि चैरलॉट के कमरे में बचपन से ही कोणार्क मंदिर की तस्वीर थी, जिसे वो बचपन से तलाश रहीं थी। इसके अलावा महानंदिया चैरलॉट के म्यूज़ीशियन होने पर मुग्द थे।
बहरहाल, इन दोनों की विदाई का वक़्त आया और चैरलॉट वापस अपने देश लौट गयीं। इसके बाद महानंदिया चैरलॉट से मिलने के लिए भारत से स्वीडेन तक की यात्रा की। ये यात्रा 7 देशों से गुजर कर साधारण साइकिल से स्वीडेन पहुँचे थे। इनमें महानंदिया को 4 महीने, तीन सप्ताह लग गये थे।
Author: Amit Rajpoot
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