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आस्था एक ऐसी चीज़ है, जिसके दम पर इंसान कुछ भी कर सकता है। जी हाँ, ऐसा इसलिए संभव हो पाता है, क्योंकि आस्था में महान शक्ति होता है। इसका सबसे विशाल संगम हर साल होता है कुंभ-पर्व में। जी हाँ, कुंभ-पर्व हिन्दुओं का एक बेहद चर्चित, महत्वपूर्ण और विशालतम पर्व है। इसमें श्रृद्धालु कुंभ-पर्व स्थल प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में भारी संख्या में सम्मिलित होकर स्नान करते हैं। आपको बता दें कि इन स्थानों पर 12 वर्षों के अंतराल में महाकुंभ यानी कि पूर्ण कुंभ का आयोजन होता है, जिसमें दुनियाभर से बारी संख्या में श्रृद्धालु यहाँ पहुँचकर स्थान और दान करके कृपा पाते हैं।
आपको बता दें कि कुंभ की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुयी है। जी हाँ, समुद्र मंथन के बाद जब उससे अमृत कलश निकला तो इन्द्र का पुत्र जयंत अमृत लेकर आकाश में उड़ गया। वहाँ आकाश में देवताओं और असुरों में अमृत के लिए जमकर युद्ध हुआ। ये युद्द 12 दिनों तक चला। इस युद्ध के दौरान अमृत कलश से कुल 4 अमृत बूँदें पृथ्वी पर अलग-अलग समय में अलग-अलग स्थानों पर आ गिरीं। ये चारों बूँदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक पर गिरी थीं। इसीलिए इन चारों स्थानों पर ही कुंभ-पर्व मानाया जाता है।
गौरतलब है कि कुंभ-पर्व भारत की पवित्र नदियों के किनारे ही लगता है, क्योंकि प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में जो अमृत गिरा था वो इन नदियों में ही गिरा। इसके बाद से भारत की ये नदियाँ जिनके किनारे कुंभ-पर्व लगता है अत्यधिक पवित्र हो गयीं।
आपको बता दें कि प्रयागराज में लगने वाला कुंभ गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम पर लगता है। इसके अलावा हरिद्वार में लगने वाला कुंभ गंगा नदी पर, नासिक में ये गोदावरी नदी के किनारे और उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे लगता है। इस साल 14 जनवरी से कुंभ का आयोजन हो रहा है। सभी श्रृद्धालु इसका लाभ लेने प्रयागराज पहुँचेंगे।
Author: Amit Rajpoot
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