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विचारों के प्रति सजग होना बेहद जरूरी हैं क्योंकि आपके व्यक्तित्व में विचारों का बेहद अहम योगदान होता है ... आप जो सोचते हैं वो व्यवहार में उतरता है और आपका व्यहार ही आपके व्यक्तित्व की जरिया बनता है। इसीलिए कहते हैं कि इंसान जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। ऐसे में विचारो पर नियंत्रण होना आवश्यक है, जबकि कुछ लोग चाहकर भी इनसे निजात नहीं पा पाते हैं, ऐसे लोगों के मन में हमेशा अजीब सा डर, भय या दूसरों के प्रति ईष्या की भावना बनी रहती है। अगर आप भी इस तरह के नकारात्मक विचारों से परेशान हैं तो हमारा ये खास लेख आपके लिए ही है, जिसमें आज हम आपको इसका कारण और इससे निजाते पाने के उपाय बताने जा रहे हैं।
क्यों आते हैं मन में नकारात्मक विचार
अगर तथ्य की बात करें तो शोध बताते हैं कि हर रोज हमारे मन-मस्तिष्क में लगभग 60,000 के करीब विचार आते हैं, जिनमें से 70-80% नकारात्मक विचार ही होते हैं। अब जो व्यक्ति अपने विचारों के प्रति सजग होता है वो नकारात्मक विचारो पर अंकुश पा लेता है, वहीं जो लोग इन्हें बढ़ावा देते हैं वो इनका शिकार बन जाते हैं।
जी हां, कई बार हम खुद भी ऐसे विचारों को अपने मन-मस्तिष्क में आश्रय देते हैं, ऐसा दो तरीके से होता है। पहला ही कि हम ऐसे विचारों के लिए कुछ अधिक संवेदनशील हैं जैसे कि हमारे आसपास कुछ घटित हो रहा है और हम उसके लिए मन में तरह तरह के विचार करने लगते हैं, कहीं कुछ गलत तो नहीं हो रहा या कहीं कुछ गलत तो नहीं हो जाएगा। ऐसा बहुत अधिक सोचने वाले लोग करते हैं।
वहीं दूसरा तब होता है, जब आप ऐसे विचारों से पीछा छुड़ाना चाहने के चक्कर में बार-बार ऐसी ही नकारात्मक बाते सोचते हैं। मतलब आप जितना इनसे दूर जाने की कोशिश करते हैं, ये आपको उतना ही सताती हैं। असल में ऐसा इसलिए होता है कि आप इसे छुटकारा पाने के चक्कर में इन्हे और अपने मन-मस्तिष्क में जगह दे देते हैं।
चलिए अब आपको इनसे छुटकारा पाने के कुछ व्यवहारिक तरीके बताते हैं...
• खुद को अधिक से अधिक शांत रखने की कोशिश कीजिए और अपने विचारों का तटस्थ भाव से निरक्षण कीजिए। इसके लिए आपको बहुत अधिक जोर नहीं देना क्योंकि अगर आप इनसे बहुत अधिक बचने की कोशिश करेंगे तो एक तरह से आप इन्ही के भंवर में फंसेगें। इसलिए बेहतर यही है कि ऐसे नकारात्मक विचारों के प्रति तटस्थ रह कर सजग रहें, पर इन्हें अधिक तरजीह ना दें।
• जब भी इस तरह के विचार आपको परेशान करें खुद को किसी दूसरे काम में व्यस्त कर लें, आपको ऐसे विचार को दिमाग में घर कर करने का मौका ही नहीं देना है।
• अगर फिर भी कोई विचार या चिंता आपको परेशान किए जा रही है, तो आप उसे लेखनी के जरिए भी बाहर निकाल सकते हैं। जी हां, जब आप खुद को ऐसे विचारों से परेशान पाएं तो उसे शब्दों के जरिए बाहर निकाल दें, क्योंकि कई बार ऐसी चीजें बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ़ती हैँ। चूंकि आप इसे किसी से कह तो सकते नहीं इसलिए लिखकर ही इन्हें व्यक्त कर दें। इससे आपको काफी शांति मिलेगी।
Author: Yashodhara virodai
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