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भारत त्योहारों का देश कहलाता है, क्योंकि यहां हर काल और मौसम का उत्सव त्योहार के रूप में मनाया जाता है। ऐसा ही एक त्योहार है मकरसंक्रांति जो देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से एक ही समय पर मनाया जाता है। जी हां, त्योहार तो एक ही है, बस नाम और इसके मनाने के तरीके बदल जाते है… जैसे तमिलनाडु में पोंगल तो असम में ये बिहू के रूप में मनाया जाता है। वहीं उत्तरप्रदेश और बिहार मे जहां से खिचड़ी के रूप में जाना जाता है, वहीं गुजरात में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। चलिए आपको अलग अलग राज्यो के हिसाब से मकरसंक्रांति के अलग-अलग स्वरूपों से परिचय करवाते हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी का त्योहार
उत्तरप्रदेश और बिहार मे मकर संक्रांति को खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है, जहां इस दिन दान-पुण्य का खास महत्व माना जाता है। प्रयागराज में तो इसी दिन से माघ मेले की शुरूआता होती है। वहीं इस दिन घरों में और सार्वजनिक रूप से भोग के लिए खिचड़ी पकाई जाती है।
गुजरात में उत्तरायण
वहीं गुजरात में इसे उत्तरायण के रूप में मनाया जाता है, जो कि गुजराती लोगों के लिए बेहद शुभ दिन माना जाता है । वहीं इस दिन पतंग उड़ाने की प्रथा है। ऐसे में गुजरात में मकर संक्रांति के दिन पर सार्वजनिक तौर पर पंतगोत्सव का भी आयेाजन किया जाता है।
राजस्थान में मकर संक्रांति
तमिलनाडु में पोंगल
वहीं तमिलनाडु में इसे चार दिवसीयी त्योहार पोंगल के रूप में मनाया जाता हैं... जहां पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल मनाया जाता है। असल में तमिलनाडु में इस त्योहार को मनाने के लिए सबसे स्नान ध्यान करके घर में खुले आंगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनाई जाती है और इसी को पोंगल कहा जाता है। इसके बाद सूर्य देव की पूजा होती है और फिर उसी खीर को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
असम में बिहू
असम में मकर संक्रांति बिहू के रूप मे मनाई जाती है, जहां लोग इस त्योहार के साथ बसंत के आगमन की खुशियां मनाते हैं।
पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी
वहीं पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी पर्व का त्योहार मनाया जाता है जहां रात के समय लोग आग के सामने नाचते गाते हैं और नई फसल का स्वागत करते हैं।
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