Forgot your password?

Enter the email address for your account and we'll send you a verification to reset your password.

Your email address
Your new password
Cancel
मकर संक्रान्ति का दिन सम्पूर्ण पृथ्वी के लिए संक्रमण का दिवस होता है। जी हाँ, आपको बता दें कि इस दिन सूर्य अपनी चाल बदलकर पृथ्वी पर मकर रेखा से भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगता है। फिर धीरे-धीरे यह अपने निश्चित समयानुसार कर्क रेखा में भी प्रवेश करता है। इसका सीधा और प्रत्यक्ष कारण और प्रमाण है कि जीवन का कारक सूर्य जब पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध की ओर भूमध्य और कर्क रेखा की ओर पहुँचता है, तो वहां के निवासियों के लिए वह जीवन के कई सारे कारण पैदा करता है। मसलन समुद्र के जल की सतह गर्म होती है, जो वाष्पीकृत होकर वर्षा का कारण बनती है। इसके बाद आपको पता ही है कि वर्षा हमारे जीवन चक्र की सबसे बड़ी प्रक्रिया है, जिससे हमारा पूरा फसल चक्र, मौसम चक्र और जीवन चक्र चलता है। इस प्रकार सूर्य ही समस्य जीवन का मूल कारण है।
अब समझने वाली बात यह है कि सूर्य के चाल चक्र के अनुसार ही हम मकर संक्रान्ति का पर्व मनाते हैं। इसलिए बहुत ज़रूरी है कि हम मकर संक्रान्ति का पर्व उसी दिन मनाएँगे जिस दिन सूर्य मकर रेखा से वापस भूमध्य और कर्क की ओर प्रस्थान करने को होता है। ऐसे में सूर्य तो राशि के अनुसार ही गति करता है। फिर बड़ा सवाल है कि मकर संक्रान्ति गेग्रोरियन कैलेंडर के हिसाब से ही क्यों मनाया जाता है, जबकि हिन्दुओं के बाक़ी सारे त्यौहार हिन्दू कैलेण्डर या हिन्दू पांचांग के हिसाब से ही मनाए जाते हैं।
सबसे पहले आपको बता दें कि भू-वैज्ञानिकों की काल गणना है कि मकर संक्रान्ति का पर्व प्रत्येक 75 वर्षों के बाद गेग्रोरियन कैलेंडर के हिसाब से एक तिथि (Date) आगे खिसक जाता है। वास्तव में यह सूर्य की चाल में होने वाले परिवर्तन के कारण होता है। उदाहरण के तौर पर स्वामी विवेकानंद का जन्म गेग्रोरियन कैलेंडर के हिसाब से 12 जनवरी लेकिन मकर संक्रान्ति के दिन हुआ था, जो आगे के वर्षों में 13 जनवरी फिर 14 जनवरी और अब 15 जनवरी की तरफ यह त्यौहार शिफ्ट होता जा रहा है।
इसका मतलब साफ है कि मकर संक्रान्ति का पर्व आज भी हिन्दू पांचांग के हिसाब से ही मनाया जाता है यानी कि जिस तिथि को सूर्य अपनी गति में परिवर्तन लाता है उस दिन। लेकिन इसे गेग्रोरियन कैलेंडर के मानने वालों की सुविधा के लिए इसी की तिथि के दिन ही रख देते हैं, क्योंकि मकर संक्रान्ति का तिथि परिवर्तन 75 वर्षों के बाद ही संभव होता है।
Author: Amit Rajpoot
ऐसी रोचक और अनोखी न्यूज़ स्टोरीज़ के लिए गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करें Lop Scoop App, वो भी फ़्री में और कमाएँ ढेरों कैश आसानी से!
YOUR REACTION
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

Add you Response

  • Please add your comment.