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मकर संक्रांति का ये त्यौहार हर साल बड़े ज़ोर-शोर से मनाया जाता है। ये त्यौहार भारत के अलग हिस्सों में अलग तरीके से मनाया जाता है। राबी फसल कटने के समय मनाए जाने वाले इस त्यौहार को लेकर भारत के हर क्षेत्र में अलग-अलग मान्यता है। बात करें खासकर गुजरात और राजस्थान की तो यहां पर लोग सुबह से ही पतंग उड़ाकर इस त्यौहार को मनाते हैं। तो जानिये कि क्यों उड़ाई जाती है मकर संक्रांति पर पतंग।
धार्मिक मान्यता
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर पतंग इस लिए उड़ातें हैं क्योंकि, सबसे पहले ये परंपरा श्रीराम के समय से शुरू हुई थी। मकर का महीना लग गया था और इसी बीच श्रीराम पतंग उड़ा रहे थे और ये पतंग उड़ते-उड़ते इंद्रलोक पहुंच गयी। वहां इंद्र के पुत्र जयंती की पत्नी ने वो पतंग अपने पास रख ली। वो ये सोचने लगी की अगर ये पतंग इतनी सुंदर है तो इसे उड़ाने वाला कितना सुंदर होगा। जब काफी देर तक श्री राम का पतंग वापस नहीं आया तो श्रीराम ने हनुमान जी को पतंग ढूंढने भेजा। पतंग ढूंढते-ढूंढते हनुमान जी इंद्रलोग जा पहुंचे और एक औरत के हाथ में वो पतंग देखी। जब हनुमान ने जाकर पतंग वापस मांगी तो जयंती की पत्नी बोलीं की जाओ पहले उसके दर्शन कराओ जिसकी पतंग है।
ये सुनते ही हनुमान जी वापस राम के पास आये और उनको जयंती की पत्नी का ये संदेश दिया। जिस पर श्रीराम ने कहा कि मैं वनवास के समय अपना दर्शन दूंगा। ये संदेश लेकर हनुमान वापस इंद्रलोक पहुंचे। इसी के बाद से ये पर्व मनाया जाने लगा।
सेहत के लाभ
अगर इसको मौसम के हिसाब से देखें तो आज के दिन मौसम काफी खुला हुआ होता है। जिसके कारण अच्छी धूप निकलती है और लोग इसी साफ मौसम के कारण सुबह-सुबह पतंग उड़ाने निकलते हैं। रिसर्च की माने तो सुबह की ताज़ा धूप सेहत में सुधार लाती है। इसी के साथ आपको विटामिन डी भी मिलता है। जिससे हड्डियां मज़बूत होती हैं।
Author- Anida Saifi
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