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वशिष्ट प्राणायाम सबसे सरल किन्तु बेहद प्रभावकारी प्राणायाम है। जी हाँ, आपको बता दें कि वशिष्ट प्राणायाम बहुत प्राचीन नहीं है। यह इतना सरल और दिलचस्प है कि वशिष्ट प्राणायाम को बीमार व्यक्ति भी कर सकता है, फिर वह चाहे कितना भी कमज़ोर और बीमार महसूस कर रहा हो। इसको करने से मनुष्य के प्राण का विस्तार होता है, जो कि प्रणायाम का मूल मक़सद है। इससे शरीर में जितना भी प्राण का विस्तार होगा यानी कि हीलिंग का प्रॉसेस बढ़ेगा उतना ही शरीर को दुरुस्त करने या इलाज करने का प्रॉसेस भी तेज़ होगा। मतलब साफ है कि वशिष्ट प्राणायाम से बीमारी भी जल्दी ठीक होती है।
इसके अलावा वशिष्ट प्राणायाम करने से व्यक्ति का मन स्थिर होता है। इससे शान्ति आती है और नींद न आने की समस्या तुरन्त दूर हो जाती है। वशिष्ट प्राणायाम को सोने से पहले एक बार करने से आपकी क्वालिटी नींद में बढ़ोत्तरी होती है।
चूंकि वशिष्ट प्राणायाम एकदम से आधुनिक प्राणायाम है। इसलिए इसे योग के सबसे प्राचीन और प्रामाणित योग वाशिष्ट के नाम पर ही परिवर्तित करके वशिष्ट प्राणायाम के नाम में प्रचारित किया जा रहा है। इसके अलावा आप इसे इधर-उधर कहीं-कहीं एब्डॉमिनल ब्रीदिंग आदि के नाम से भी जानते होंगे।
इसे करने के लिए आप सीधे लेट जाएँ। अपने पैरों को मोड़कर एड़ियों को हिप से सटाएँ। अब साँसों को भरें और पेट को धीरे-धीरे बाहर की तरफ फुलाएँ। फिर धीरे-धीरे साँसों को बाहर छोड़ें और पेट को अंदर करते जाएँ। आपको बता दें कि ऐसा करने से वास्तव में हमारे शरीर के भीतर डायफ्राम की अक्सरसाइज़ होती है।
आपको बता दें कि हमारे शरीर में मौजूद डायफ्राम सांस लेने और छोड़ने का काम करता है। वशिष्ट प्राणायाम करने से इसी डायफ्राम का व्यायाम हो जाता है और हमारे साँस लेने और छोड़ने की क्षमता का विकास होता है। इससे प्राणों का सबसे अधिक शक्ति मिलती है।
Author: Amit Rajpoot
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