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विद्यार्थियों के लिए योग करना बहुत ही ज़रूरी माना जाता है। इससे विद्यार्थियों की अंतः प्रज्ञा जागृत हो जाती है। इसमें कई तरह के योग शामिल किये गये हैं। वैसे भी आपको बता दें कि योग के सूत्रों में विद्यार्थियों के लिए कुछ विशेष तरह के योगों का सुझाव मिलता है। जी हाँ, विद्यार्थियों को अपने शिक्षा जीवन में शीर्षासन, मयूरासन, पद्मासन और वृक्षासन जैसे योगों को शामिल करके चलना चाहिए। योग करने से विद्यार्थियों के मस्तिष्क से अंधेरा दूर होता है और प्रज्ञा जागृत होकर प्रतिस्थापित भी होगी। वास्तव में विद्यार्थी काल होता ही इसीलिए है। इसलिए आइए आज आपको बताते हैं कि विद्यार्थियों के लिए और कौन-कौन से योग ज़रूरी होते हैं।
आपको बता दें कि जो विद्यार्थी इन योगों को अपने जीवन में अपनाते हैं वो अन्य की अपेक्षा अधिक मेधावी होते हैं। ये महज उत्साह बढ़ाने वाली बात नहीं है, बल्कि ये एक अटल सत्य है। जिस दिन भारत के सभी छात्र और छात्राएँ अपने जीवन में योग को अपनाकर अपनी जीवन पद्यति को गति देंगे उस दिन उनकी गति से ही भारत को अच्छी ओर जायेगा, उसका विकास होगा। इसलिए हर छात्र और छात्रा को चाहिए कि वो अपने जीवन में इन उक्त योगों को शामिल करें, ताकि उन्हें कमसिन उम्र में ही न्यूरो, डायबिटीज और मधुमेय जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े, जोकि आजकल के बच्चों में बड़ी सामान्य सी बात हो गयी है।
इसके लिए बच्चों को योग का मार्ग अपनाना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले तो छात्र और छात्राएँ भोर में उठने की आदत डालें। यह किसी योग से कम नहीं है। इसके बाद नित्य कर्म आदि करके थोड़ी देर तक ध्यान लगाएँ और फिर शीर्षासन, मयूरासन, पद्मासन और वृक्षासन जैसे योगों को करके स्नानादि से निवृत्त हो लें। आपको बता दें कि ऐसी योगमयी दिनचर्या को अपनाकर हर छात्र अपने जीवन में ,दैव आगे ही बढ़ेगा, क्योंकि उसका चित हमेशा सही जगह लगेगा।
Author: Amit Rajpoot
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