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योगशास्त्र कहता है कि प्राणायाम के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उपयुक्त और उत्तम होता है, क्योंकि इस वक़्त में ब्रह्म मुहूर्त की हवा सबसे आपूर्तिजनक और उत्तम गुणवत्ता से युक्त होती है। सोचने वाली बात है कि ऐसे वक़्त में जब चारो ओर प्रदूषण का वातावरण फैलता जा रहा है, आपके लिए भोर में यानी कि ब्रह्म मुहूर्त में उठना काफी ज़्यादा फायदेमंद है। इसलिए जब ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है तो ऐसे समय में प्राणायाम करना काफी फायदेमंद होता है। इसलिए चतुराई इसी में है कि आप जब भी प्राणायाम करें तो ज़्यादा ऑक्सीजन वाले किसी वन क्षेत्र में या गार्डेन में करें। आइए आज आपको 2 मंगलकारी प्रणायामों के बारे में बताते हैं, जिन्हें भोर में करने से आपके भीतर दिनभर के लिए ताज़गी बनी रहेगी।
सबसे पहले तो आपको यह बता दें कि जंगल में मंगलकारी प्राणायाम शुरु करने से करने से पहले आपको 5 बार ऊँकार का नाद करना होगा। जी हाँ प्राणायाम करने से पहले ऊँकार यानी की ऊँ की ध्वनि का नाद करना काफी फ़ायदेमंद होता। इससे आपके ध्यान एकाग्र होता है और आपको लाभ भी अधिक मिलता है। इसलिए प्राणायाम करने से पहले आप 3-5 बार ऊँकार का नाद करें।
भस्त्रिका प्राणायामः
इसके बाद आपको सबसे पहले भस्त्रिका प्राणायाम करना होगा। भस्त्रिका प्राणायाम करते समय आप अपने साथ जुड़ते चले जाने के लिए आँख बंद करके इसे करें। यह सीने में हवा भरकर आपकी नाड़ियों को शुद्ध करता है।
नाड़ी शोधन प्राणायामः
नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के लिए आप अनुलोम विलोम प्रणायम सबसे बेस्ट होता है। जी हाँ, आपको बता दें कि नाड़ी शोधन करने के लिए योगियों की सबसे पहली होता है अनुलोम विलोम प्राणायाम। इसकेलिए यह प्राणायाम अगर आप अपनाएंगे तो आपकी नाड़ी शोधन की प्रक्रिया में बेहतर लाभ मिलता है। ध्यान देने वाली बात है कि नाड़ी शोधन प्राणायाम करते समय आप ज्ञान मुद्रा और विष्णु मुद्रा में ही बैठें।
Author: Amit Rajpoot
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