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हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के सुनहरे दौर ही मशहूर और मारूफ़ आदाकारा माला सिन्हा का जन्म 11 नवम्बर, 1936 को कलकत्ता में हुआ था। इनके पिता का नाम अलबर्ट सिन्हा था, जो कि एक नेपाली क्रिश्चियन थे। दिलचस्प है कि माला सिन्हा के बचपन का नाम आलदा सिन्हा था। लेकिन स्कूल के दिनों में इनके दोस्त आलदा को डालडा-डालडा कहकर चिढ़ाया करते है। इसी के चलते उन्होंने लदा से अपना नाम बदलकर माला रख लिया फिर तब से इनको माला सिन्हा के रूप में ही जाना जाने लगा। इस समय माला सिन्हा 84 साल की हैं। मालूम हो कि माला सिन्हा ने बतौर बाल कलाकार अपने करिअर की शुरुआत बंगाली फ़िल्म जय वैष्णों देवी से किया था। इसके बाद ये श्री कृष्ण लीला, जोग-बियोग और धूली में भी बाल कलाकार के रूप में नज़र आयीं।
आपको बता दें कि माला सिन्हा ने इस दौरान बंगाली फ़िल्मों के अलावा कुछ नेपाली फ़िल्में भी कीं। लेकिन फिर जब इन्होंने हिन्दी फ़िल्मों का रुख़ किया तो शीर्ष की अभिनेत्री बन गयीं। जी हाँ, 50 के दशक से लेकर 70 के दशक तक माला सिन्हा ने बतौर लीड हिरोइन हिन्दी फ़िल्मों में काम किया। इनके साथी संगाती इनकी तुलना हिन्दी फ़िल्मों में बेहद मशहूर अभिनेत्री नरगिस दत्त से किया करते थे। उनका कहना था कि माला सिन्हा का चेहरा नरगिस दत्त की ही तरह लम्बा और ख़ूबसूरत है।
आपको बता दें कि ये शुरुआत से ही मल्टी टैलेंटेड रही हैं और इन्हें बतौर सिंगर भी पहचान मिली थी। जी हाँ, माला सिन्हा ऑल इंडिया रेडियो से अप्रूव्ड सिंगर भी हैं। लेकिन दो राहे पर खड़ी ज़िन्दगी में इन्हें या तो एकटिंग को चुनना था या फिर अपनी सिंगिंग को। इस तरह से माला सिन्हा ने अभिनय को ही अपना पेशा बनाया। हालाँकि आपको यह भी जानना चाहिए कि माला सिन्हा का बॉलीवुड से तारुफ़ कराने में अभिनेत्री गीता बाली का हाथ था।
Author: Amit Rajpoot
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