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छोटे-छोटे क़िरदार निभाने वाले बड़े-बड़े अभिनेता फ़िल्मों को फ़्लॉप से हिट और हिट से सुपरहिट बना सकते हैं। ये बात साबित की थी ज़बरदस्त और शानदार अबिनेता केश्तो मुखर्जी ने। केश्तो मुखर्जी का जन्म 7 अगस्त, 1905 को महाराष्ट्र के मुम्बई में हुआ था। केश्तो मुखर्जी का नाम आते ही हमारे सामने एक शराबी का चेहरा घूम जाता है। जी हाँ, उन्हें देखते ही लगता है कि कोई शराबी आपकी और चला आ रहा है और आप उससे हल्के-फुल्के गप्प लड़ाने को तैयार हैं। वास्तव में अपने क़िरदार को इतने बख़ूबी अंदाज़ में पेस करने वाले केश्तो मुखर्जी ऐसे ही रहे हैं, जिनके निभाये गये क़िरदार हमारे सामने आज भी चलते-फिरते हमें यूँ ही नज़र आ जाते हैं।
हालाँकि ये बात बहुत ही कम लोगों को पता होगी कि केश्तो मुखर्जी ने आज तक दारू को हाथ भी नहीं लगाया है। ये तो उन चंद लोगों में से हैं, जो बस चाय पानी तक ही सीमित रहते हैं। आपको बता दें कि केश्तो मुखर्जी को फ़िल्मों की ओर लाने वाले कोई और नहीं बल्कि महान डायरेक्टर ऋत्विक घटक थे। ऋत्विक घटक की ही एक बंगाली फ़िल्म नागिक में सबसे पहले केश्तो मुखर्जी ने अभिनय किया। फिर ज़बरदस्त निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने इन्हें फ़िल्म मुसाफ़िर में काम दिया। इस तरह से केश्तो मुखर्जी हिन्दी और बंगाली फ़िल्मों का हिस्सा बने रहे।
सही मायनों में देखा जाये तो केश्तो मुखर्जी के शराबी अंदाज़ को सबके सामने लेकर आये फ़िल्म मेकर असित सेन। उनकी फ़िल्म माँ और ममता में केश्तो मुखर्जी के शराबी अंदाज़ ने सबको दीवाना बना लिया। फिर ये अंदाज़ ऐसा भाया कि राजकपूर की फ़िल्म तीसरी क़सम में भी इन्होंने कुछ ऐसा ही किया। इसके अलावा फ़िल्म साधु और शैतान, पड़ोसन और ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म चुपके-चुपके में केश्तो मुखर्जी ने अपने इसी अंदाज़ के दम पर ख़ूब धमाल मचाया।
Author: Amit Rajpoot
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