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गीता सभी चीज़ों का हल है, फिर चाहे वो आलस्य ही क्यों न हो। जी हाँ, आपको बता दें कि आलस्य इस संसार की सबसे बड़ी और गंभीर बीमारी है। ये एक ऐसी बीमारी है, जो आपकी स्वर्ग जैसी ज़िन्दगी को नर्क बनाकर रख देती है। आपने लोगों को यह कहते हुए अक्सर ही सुना होगा कि फला लड़का था तो बहुत बुद्धिमान लेकिन उसकी क़िस्मत ने कबी उसका साथ नहीं दिया या फिर यह कि ढेकाने ने अपने सक्सेस प्रोजेक्ड के लिए प्लान तो बहुत ही बढ़िय बनाया था, लेकिन परिस्थियों ने कभी अपनी मंज़िल को पा नहीं सका।
अगर आप भी अपने बारे में ऐसा ही कुछ सोचते हैं या फिर आपके आसपास कोई ऐसा इस तरह से सोच रहा है तो फिर आपको गीता की शरण में जाना चाहिए। जी हाँ, आपको बता दें कि ऊपर जितने भी लक्षण बताये गये हैं, उन सबके पीछे एक ही कारण है व्यक्ति का आलसी होगा। इस बात को पवित्र गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है। इसलिए किसी भी हालत में अपने आसपास आलस्य को जगह न दें।
आलस्य के बारे में इसे दूर करने की सलाह देते हुये गीता के दूसरे अध्याय के तीसरे श्लोक में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि अपने विचारों में नपुंसकता न आने दो। ऐसे विचार और ऐसी बातें इंसानों को शोभा नहीं देती। अपने हृदय में उत्पन्न हो रही इस दुर्बलता को त्यागकर खड़े हो जायें और कर्महीन विचारों और अपने आलस्य रूपी इस शत्रु का नाश करो।
वास्तव में आलस्य हमारा क्षण भर का ही शत्रु होता है। यदि हम उससे डर गये तो फिर वह हमारा नाश कर बैठेगा। वहीं यदि हम उस एक क्षण में ही उसे त्याग दें तो हमारी हर क्षेत्र में विजय होगी। आलस्य के संबंध में गीते के अलावा कई और विद्वानों ने भी अपने मत व्यक्ति किये हैं।
Author: Amit Rajpoot
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