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बुद्ध एक पशुयोनि में जन्में थे। जी हाँ, आपको बता दें कि बुद्ध ने ही कभी एक कथा कही थी, जिसमें वह एक पशुयोनि में जन्में थे और वह था हिरण. जी हाँ, कथा बते से पहले यह बात जान लेना बहुत ही ज़रूरी है कि बुद्ध पहले ही गये गये थे कि इस कथा में यह समझने का प्रयास किया जाना चाहिए कि इस कता में दर्षाये गये पशु-पक्षियों और इंसानों में क्या समानताएँ हैं। बहरहाल, हिरण योनि में जन्में बुद्ध जिस जंगल में रहते थए वहाँ एक स्वच्छ सरोवर भी था, जहाँ सभी पानी पिया करते थे। इस सरोवर में एक कछुआ भी रहता था और सरोवर के निकट एक वृक्ष पर एक सुंदर मैना रहती थी। कछुआ, हिरण और मैना इन तीनों बहुत ही गहरी दोस्ती थी।
एक दिन एक शिकारी हिरण के पाँव देखता-देखता सरोवर के तट तक आ गया और मज़बूत रस्सियों का एक जाल बिछाकर एक छोटी कुटिया में बैठ गया। उस दिन जब हिरण पानी पीने उस सरोवर में आया तो शिकारी के बिछाये गये जाल में फँस गया। हिरण को जाल में फँसा कछुआ और मैना भी वहाँ आ गये। उन्होंने सोच-विचार करना शुरू किया कि अपने मित्र को कैसे बचाया जाये।
मैंने ने कछुए से कहा कि मैं जाकर शिकारी को उसकी झोपड़ी में रोकती हूँ और तुम जाल काटो। मैंने उड़कर शकारी के झोपड़ी के सामने एक आम के पड़ पर जा बैठी। जैसे ही शाम को शिकारी अपनी झोपड़ी से बाहर निकला वैसे ही मैना ने अपनी पूरी ताक़त लगाकर उसपर वार किया। शिकारी घबराकर झोपड़ी में जा घुसा औप फिर बाद में चेहरे को कवर के बाहर आया। मैंना उड़कर सरोवर के पास पहुँची। और दोनों को शिकारी के आने का संदेशा सुनाया।
यहाँ कछुए का मुँह जाल को काटते-काटते लहू-लुहान हो गया था, वह थक चुका था। ऐसे में शिकारी के आने पर ना तो पेड़ पर रही। हिरण भागकर पास की झाड़ी में जा छुपा। बेचारा कछुआ ही शिकारी के हाथ लग गया। हालाँकि बाद में हिरण ने भी कहुये की जान बचाई। ऐसे में बुद्ध कहते हैं कि ऐसी घटनाएँ हमारे जीवन में हर समय घटित होती रहती है। इसलिए अपनी चेतना को हमेशा जगाये रहो, ताकि आप परोपकार कर सको।
Author: Amit Rajpoot
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