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सिद्धार्थ जीवन से संबंधित सभी प्रश्नों का उत्तर जानना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने हर वह रास्ता अपनाया जिन पर चलकर वह अपने प्रश्नों के उत्तर पा सकें और एक दिन ऐसा भी आया जब सिद्धार्थ तपकर बुद्ध बनें। तब उन्होंने अपने सभी प्रश्नों का उत्तर पा लिया। वह मनुष्य के जीवन को भलीभाँति जानते हैं और समझते हैं। लेकिन अन्य लोग इस बात को नहीं समझते हैं। इसलिए आम जनमानस को भी इन बातों का मर्म पता चले, इसके लिए बुद्ध ने कई सारे प्रयास किये हैं। महात्मा बुद्ध ने जीवन को समझाने के लिए 4 तरह के सत्य के बारे में बताया है जो मनुष्य के आम जनजीवन से जुड़ा हुआ है। प्रचीन काल से वर्तमान तक बुद्ध के बताये हुये ये चार सत्य सभी के जीवन को प्रभावित करते रहे हैं। आइए बुद्ध के बताए इन चार सत्यों के बारे में जानें।
1. संसार में दुःख हैः
पहला सत्य बुद्ध ने यह बताया कि संसार दुःखदायी है। बच्चा जब अपनी माँ के गर्भ से निकलता है, तो वह पूरी करह से दुःख में प्रवेश करता है। यहाँ उसे हर क़दम पर दुःख ही भोगना पड़ता है।
2. तृष्णा बुरी हैः
तृष्णा बेहद बुरी बला है। बुद्ध कहते हैं कि इस संसार में हर इंसान अपनी तृष्णा के कारण ही तो दुःखी है। अपनी तृष्णा पर विजय पाकर कोई भी महान हो सकता है और सुख का अनुभव कर सकता है।
3. दुःख निरोधः
भगवान महात्मा बुद्ध कहते हैं कि दुःख एक ऐसी चीज़ है जिसे रोका नहीं जा सकता है। जी हाँ, संसार में दुःख ही एक मात्र सत्य है जो इस संसार के होने का प्रतीक है। यानी कि इस दुनिया में हमें मिल रहे दुःख के कारण ही हम यहाँ अपने होने और सुख का अहसास कर पाते हैं।
4. दुःख के निवारण के लिए आष्टांगिक मार्ग हैः
इस मार्ग में चलने वाले व्यक्तियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है। यह सत्य का जानकर जीवन में आगे बढञने का मार्ग होता है। आष्टांग मार्ग चीज़ों को सही ढंग से देखने के एक बेहतरीन नज़रिया है।
Author: Amit Rajpoot
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