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अरहर भारत में पसन्द की जाने वाली सबसे पसंदीदा दाल है। यह प्रोटीन से भरपूर होती है। भारत के ज़्यादातर घरों में अरहर की दाल ही का ही सेवन किया जाता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में ही अरहर की पैदावार सबसे ज़्यादा होती है और यहाँ ही इसकी सबसे अधिक खपत होती है। इसके अलावा आपको बता दें कि भारत में आयात के मामले में अरहर ही ऐसी चीज़ है जिसका आयात सबसे अधिक मात्रा में किया जाता है। इसे संस्कृत में तुवरी, पीतपुष्पा और वृत्तबीजा कहते हैं। हिन्दी में अरहर के अलावा इसे तुअर भी कहते हैं। मारवाड़ी में तूर या अरेड़ अरहर के ही नाम हैं। इसके अलावा पंजाबी में अरहर को हरहर के नाम से जानते हैं।
अरहर एक ऐसी दाल है, जिसके कई सारे आयुर्वेदिक लाभ होते हैं। जी हाँ, आपको बता दें कि अरहर की दाल में विटामिन सी, विटामिन बी1, विटामिन बी9, विटामिन बी3, आयरन, मैंगनीज़, फ़ास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और मिनरल्स पाये जाते हैं, जोकि हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभदायक होते हैं।
आयुर्वेद की मानें तो अरहर मधुर, कसैली, भारी, कुछ हद तक वात कारक, रुचिकर, कांतिवर्धक, शीतल और कफ़, ज्वर, विष, वात और बवासीर को ख़त्म करने वाली है। इसका लेप करने से कफ और पित्त का नाश होता है। इसके अलावा इसका सेक करने से मेद और कफ़ जैसे विकार दूर होते हैं। इसके अलावा अरहर के बीजों की पुल्टिस से जलने वाली सूजन कम होती है।
आपको बता दें कि अरहर के पत्ते उबालकर घाव में लगाने से लाभ होता है। रक्तस्राव के अन्दर भी अये उपयोगी माना जाता है। अरहर के पत्तों के रस से कुल्ला करने से मुँह के छाले मिट जाते हैं। दिलचस्प है कि अरहर के पत्तों का रस निकालकर पीने से अफीम का नशा उतर जाता है। इस प्रकार अरहर एक बहोपयोगी दाल है।
Author: Amit Rajpoot
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