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टीनू आनन्द एक ऐसे कलाकार हैं, जो एक कुशल निर्देशक भी हैं और मंझे हुये लेखक भी। आपको बता दें कि टीनू आनन्द का पूरा नाम वीरेन्द्र राज आनन्द है, लेकिन घर वाले इन्हें टीनू कहकर पुकारते थे। इसलिए दुनिया इन्हें टीनू के नाम से पुकारने लगी और एक दिन यही टीनू बन गया टीनू आनन्द। इनके पिता इन्दर राज आनन्द हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के सबसे मशहूर राइटरों में से एक रहे। इनके भाई बिट्टू आनन्द एक प्रोड्यूसर हैं और इनका भतीजा सिद्धार्थ आनन्द एक डायरेक्टर है।
यूँ तो टीनू आनन्द का पूरा परिवार फ़िल्मों से नाता रखता है, लेकिन आपको बता दें कि जब पहली बार इन्होंने अपने लेखक पिता से फ़िल्मों में डायरेक्शन का काम करने के बारे में बताया तो वो ख़ासे नाराज़ हुये। दरअसल, इन्दर राज आनन्द यह नहीं चाहते थे कि उनके दोनों बेटे टीनू और बिट्टू फ़िल्मों में काम करें। लेकिन होनी को भला कौन टाल सकता है।
जी हाँ, ये जानकर आपको आश्चर्य होगा कि अंततः टीनू आनन्द के पिता इन्दर राज आनन्द ने ही उस दौर से मशहूर फ़िल्म डायरेक्टर सत्यजीत रे से बात की और कहा कि उनका बेटा टीनू उन्हें असिस्ट करना चाहता है। सत्यजीत रे ने अनुमति दे दी।
टीनू आनन्द सत्यजीत रे से निर्देशन के गुर सीखने के लिए बहुत बड़ा त्याग किया। जी हाँ, फ़िल्म सात हिन्दुस्तानी में जो कैरेक्टर अमिताभ बच्चन निभा रहे हैं, उसे टीनू आनन्द निभाने वाले थे, लेकिन टीनू ने ही अमिताभ के लिए फ़िल्म के निर्देशकों से बात की और ख़ुद मुम्बई से कलकत्ता चले गये। सत्यजीत रे के अलावा टीनू आनन्द ने मशहूर एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन से भी बहुत कुछ सीखा।
इसके बाद टीनू आनन्द काफी लंबे समय तक बतौर लेखक और निर्देशक काम करते रहे। इनकी निर्देशित फ़िल्मों में शहंशाह, मैं आज़ाद हूँ, मेजर साहब और कालिया का नाम सबसे ऊपर है। लेखक और निर्देशक के अलावा टीनू आनन्द ने तमाम फ़िल्मों में अपने अभिनय का भी ज़बरदस्त लोहा मनवाया।
Author: Amit Rajpoot
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