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उर्दू एक हिन्दुस्तानी ज़बान है, जैसे कि हिन्दी एक हिन्दुस्तानी ज़बान है। जी हाँ, आपने अक्सर लोगों को इस सवाल के जवाब में कि “आपकी भाषा क्या है?” यह जवाब सुना होगा- हिन्दी या फिर उर्दू। लेकिन जी नहीं जनाब, ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसलिए अब आगे से जब भी कोई आपसे पूछे कि आपकी ज़बान क्या है, तो फटाक से हिन्दी या फिर उर्दू मत बोल दिया कीजिए। जी हाँ, क्योंकि आप और हम जो ज़बान बोलते हैं वह हिन्दुस्तानी कहलाती गया है। आपको बता दें कि हिन्दी और उर्दू का बेहद प्यारा संगम है हिन्दुस्तानी ज़बान में, जिसमें उर्दू के कुछ ऐसे शब्द हैं जिनका ग़लत उच्चारण तो लोग करते ही हैं, कई बार उनके ग़लत मायने भी गढ़ लेते हैं लोग। तो आइए आज हम आपको उर्दू के ऐसे ही 3 बड़े सबक बता देते हैं, जिन्हें आपको ज़रूर ध्यान में रखना चाहिए।
ख़ुलासाः
ख़ुलासा एक ऐसा शब्द है, जिसे न्यूज़ चैनल्स सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं और हमेशा इस शब्द के ग़लत मायने गढ़ते हैं। इसके अलावा ज़्यादातर न्यूज़ चैनल्स ऐसे भी हैं जो कि इसे ग़लत तरीक़े से बोलते और लिखते हैं। फिलहाल हम आपको बता दें कि वो किसी भी बड़ी स्टोरी या मिस्ट्री को रिवील करते समय इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जबकि ख़ुलासा का मतलब किसी मिस्ट्री को रिवील करना नहीं होता है। जी हाँ, आपको बता दें हिन्दी में जो मतलब सारांश का और अंग्रेज़ी में जो मतलब समरी का होता है उर्दू में ख़ुलासा का मतलब भी वही होता है।
जज़्बातोः
वास्तव में जज़्बातों कोई शब्द नहीं होता है। जी हाँ, जज़्बा एकवचन का शब्द है और इसका बहुवचन होता है जज़्बात। इसके बाद जज़्बातों शब्द को ज़बरदस्ती प्रयोग में लाया गया है।
अल्फ़ाज़ोः
जज़्बातों शब्द की तरह अल्फ़ाज़ो के साथ भी यही दिक्कत है। आपको बता दें कि लफ़्ज़ एकवचन का मूल शब्द है, जिसका बहुवचन अल्फ़ाज़ होता है। अल्फ़ाज़ों शब्द निराधार और बिल्कुल ग़लत शब्द है।
Author: Amit Rajpoot
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